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जन्माष्टमी दो दिन क्यों, जानिए मंदिरों में इस बार कैसे मनाई जाएगी जन्माष्टमी।

प्रवीण भारद्वाज (पानीपत  )-:आदमी ही नहीं भगवान पर भी भारी  पड़ा कोरोना। आपने जन्म पर सात  ताले तोड़ बाहर आने वाले भगवान् कृष्ण इस बार कोरोना के चालते नहीं निकलेंगे मंदिर से बाहर , भगतो को घरो में ही मनाना पड़ेगा जन्माष्टमी त्यौहार। इस बार दो दिन मनाया जाएगा उत्सव। ऐतिहासिक नगरी के देवीमंदिर में जन्मास्टमी को लेकर तैयारी शुरू। 12 अगस्त को मनाई जाएगी जन्मास्टमी। मंदिर प्रबंधक कमेटी ने कहा मास्क, सोशल डिस्टेंस  व् सेनेटाइजर का इस्तेमाल कर एक एक आदमी मंदिर में कर सकेगा कान्हा के दर्शन।

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देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार बहुत ही महत्वूपर्ण है।  इस बार 11-12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। पंचांग भेद के कारण इस बार दो दिन तक जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इतिहास में ये पहला मौका है जब भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सभी जगह मंदिरों में बिना भक्तों के मनाया जाएगा। मंदिरों में सिर्फ पुजारियों की मौजूदगी में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां आरंभ हो गई हैं। पानीपत के मराठाकालीन मंदिर में मंदिर प्रबंधक कमेटी ने की तेयारिया शुरू।

मराठाकालीन देवीमंदिर में जन्माष्टमी की तेयारिया शुरू ,नियमो अनुरूप मनेगी जन्माष्टमी।

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देश भर के मंदिरों में हालांकि बड़े आयोजन नहीं होंगे, लेकिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करेंगे। जानकारी के अनुसार 11 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखने तथा 12 अगस्त को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां चल रही हैं। वंही पानीपत की जनता मथुरा के अनुसार 12 अगस्त को जन्मास्ठमी का व्रत मनाएगी।

 

ऐतिहासिक मंदिर देवी मंदिर के आचार्य शिवदत्त शुक्ल के अनुसार  जन्माष्टमी का त्योहार हर साल दो दिन होता है। मथुरा में रात 12 बजे अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में भगवान का जन्म हुआ था, जिस कारण रात में अष्टमी तिथि का महत्व हुआ, लेकिन गोकुल में अगले दिन सुबह जन्म का पता लगा तो अगले दिन जन्मोत्सव मनाया जाने लगा।

भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक ही दिन नहीं होते। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 7 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को भोर में 3 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। वंही मथुरा में 3 दिन के लिए मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर रोक लग गई है।

मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बहुत प्रसिद्ध है। हर साल यहां 5 लाख से ज्यादा लोग इकठा  होते हैं। बांके बिहारी मंदिर पर भक्तों का जमावड़ा पूरे दो दिन रहता है। इस साल पूरे मथुरा में तीन दिन तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है। मंदिरों में भीड़ जमा न करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। मथुरा की सीमाओं पर भी सुरक्षाबल तैनात हैं। वंही चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी में 11 को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पानीपत देवी मंदिर के आचार्य पंडित शिवदत्त के अनुसार  यंहा भगवान सूर्य की स्थिति को देखते हुए त्योहारों का निर्णय होता है। यहां 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनेगा

भारत में  शैव प्रमुख शहरों जैसे काशी, उज्जैन, हरिद्वार आदि में 11 अगस्त को और वैष्णव प्रमुख शहरों जैसे द्वारिका-मथुरा आदि में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। दक्षिण भारत के कृष्ण मंदिरों में भी 12 को उत्सव मनाया जाएगा। ओडिशा में 11 अगस्त को जन्माष्टमी होगी।

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