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बहादुरगढ़ प्रशासन द्वारा बनाए गए शेल्टर होम्स में रुकने वालों को नहीं मिल रहे बिस्तर

झज्जर (सुमित कुमार) । केंद्र सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद झज्जर जिला प्रशासन ने भी राजधानी दिल्ली से सटे सभी सीमाओं को सील कर दिया है। प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए शेल्टर होम्स बनाने शुरू कर दिए हैं। झज्जर जिले में 43 शेल्टर होम बनाए हैं।

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औद्योगिक क्षेत्र बहादुरगढ़ में 24 शेल्टर होम बनाए गए हैं। लेकिन इन शेल्टर होम्स की हालत बेहद दयनीय है। यह शेल्टर होम भी सामाजिक संस्थाओं द्वारा अपने स्तर पर बनाए गए हैं । जबकि प्रशासन प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने का दावा कर रहा है। हम आपको बता देगी बहादुरगढ़ में बनाए गए ज्यादातर शेल्टर होम्स सामाजिक संस्थाओं ने अपनी-अपनी समाज की धर्मशालाओं में स्थापित किए हैं। जहां रुकने वाले प्रवासी मजदूरों को ना तो सोने के लिए बिस्तर मिल रहा है और ना ही उनके लिए मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार इन शेल्टर होम्स का दौरा कर व्यवस्था सुधारने की बात कर रहे हैं। बहादुरगढ़ नगर परिषद के मनोनीत पार्षद अशोक गुप्ता ने रेलवे रोड पर अग्रसेन धर्मशाला में एक शेल्टर होम बनाया है। जहां लोगों के रहने खाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन लोग ज्यादा होने के कारण अब वहां बिस्तरों की कमी पड़ गई है।

 

जबकि सच तो यह है कि बहादुरगढ़ में अब भी हजारों की संख्या में ऐसे श्रमिक हैं जिनके पास में तो खाने को राशन है और ना ही रहने के लिए जगह। प्रशासनिक स्तर पर जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।

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