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देश को समर्पित है ये गांव,बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है

झज्जर (सुमित कुमार ) : कारगिल दिवस पर आज हम देश के एक ऐसे गांव से रूबरू कराएंगे जिस गांव के जवान केवल और केवल देश के लिए समर्पित है। जी हां हम बात कर रहे हैं हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बिशाहन की। कहने में और दिखने में यह गांव बेहद छोटा है लेकिन इस गांव का जिगरा बहुत बड़ा है। यहां हर घर से एक फौजी है, एक सैनिक है।ये गांव केवल देश सेवा के लिए ही बना है। 2500 से 3000 तक आबादी वाला यह गांव पूरी तरह से देश के लिए समर्पित है।यहां एक पीढ़ी नहीं बल्कि चार-चार पीढ़ियों से यहां के जवान देश की रक्षा कर रहे हैं। देश सेवा का जज्बा इस गांव की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि दादा-पिता,बेटे और पोते हर कोई देश की सीमा पर जाकर देश की रक्षा कर रहा है और करना भी चाहते है। इस गांव की मिट्टी से कॉन्स्टेबल से लेकर सेना अध्यक्ष तक निकले है। पूर्व सेना अध्यक्ष दलबीर सुहाग इसी गांव की देन है। जल थल वायु देश की तीनों सेनाओं में इस गांव के जवान शामिल है। आप गांव में लगे ग्राम गौरव पट पर लिखे गए वीरों के नाम इसकी बानगी स्वयं दर्शा थे है। लेकिन अफसोस जिस गांव की चार-चार पीढ़ियां देश सेवा के लिए समर्पित हो उस गांव के हालात देखकर आप हैरान रह जाएंगे। जी हां अब हम आपको गांव का एक अलग रूप दिखाने जा रहे हैं।जिस गांव के के वीरों ने विश्व यद्ध से लेकर , प्रथम, यद्ध, दूसरा यद्ध, से लेकर कारगिल की लड़ाई तक लड़ी हो, उसी गांव के जवान अब सुविधाओ के अभाव में जी रहे है। देश को समर्पित यह गांव अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जो जवान कभी देश की विभिन्न लड़ाई में शामिल थे आज वही एक्स सर्विसमैन अपने हालात बयां कर रहे है।

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वर्षों तक देश की सेवा करने वाले गांव के एक्स सर्विसमैन आज खुद सुविधाओं के अभाव में अपना जीवन व्यापन कर रहे हैं। जिस गांव को सरकार या प्रशासन द्वारा आदर्श गांव या नगर बना देना चाहिए था उस गांव के हालात एक आम गांव से बदहाल हैं। जो गांव पूरी तरह से हाईटेक होना चाहिए था वह गांव उसके लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। पीने के पानी की समस्या से लेकर पानी निकासी की समस्या जिससे पूरा गांव हमेशा तालाब में तब्दील रहता है। इतना ही नहीं गांव के लोग खेती पर भी आधारित है लेकिन गांव में हर साल बारिश के सीजन में फसल बर्बाद हो जाती है, आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि किस तरह से गांव की गलियां तालाब में तब्दील है, साथ में गांव के खेतों में भी भरा पानी तालाब की तरह दिखाई दे रहा है जिससे हर साल पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। कुल मुलाकर ये कहे जिस गांव में हर घर से फौजी है, यहाँ तक कि पूर्व सेना अध्यक्ष दलबीर सुहाग जैसे जाबाज़ ऑफिसर भी इसी मिट्टी से निकले है, आज वही मिट्टी वही गांव आंसू बहाने पर मजबूर है।

 

गांव में सुविधाओं का अभाव ऐसा है कि ग्रामीणों ने यहां से पलायन करना शुरू कर दिया है। आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि कैसे हर दूसरे घर पर ताला लटका है। एक तिहाई लोग गांव से पलायन कर चुके हैं। करें भी क्यों ना क्योंकि जिस गांव में बस परिवहन जैसी भी सुविधा न हो तो ऐसे गांव के बच्चे बाहर जाकर कैसे अपनी शिक्षा ग्रहण करेंगे। गांव में बस की कोई खास सुविधा नहीं है हर कोई अपने साधनों से ही अपने बच्चों को स्कूल या कॉलेज पढ़ने के लिए छोड़ने जाता है, तो ऐसे में आप खुद समझ जाइए कि यह कैसी सरकारें हैं कैसा सिस्टम है। जो ऐसे गांव को भी विकास के मामले में नजरअंदाज कर देता है। जिस गांव के जवान दिन-रात गर्मी-सर्दी में अपने देश की रक्षा के लिए सीमा पर डटे रहते हैं। उस गांव के ऐसे हालात दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है । सोई हुई सरकार व सोया हुए सिस्टम कम से कम ऐसे गांव की तरफ तो जरूर ध्यान दें। खैर मीडिया ने आज कारगिल दिवस पर आपको देश के ऐसे गांव से रूबरू कराया है, जिसमें केवल देश भावना है और देश भावना रखने वाले गांव के ऐसे हालात हैं, समझ से परे।

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उम्मीद करते हैं सरकार व सिस्टम सेना के लिए समर्पित ऐसे गांव के विकास के लिए आगे आए ताकि ऐसे गांव के वीरों का जज्बा देश सेवा के लिए बना रहे हैं।

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