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तीन दिवसीय 42वें वार्षिक चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन का दूसरा दिन

चंडीगढ़ 2 नवम्बर 2019: इंडियन नेशनल थियेटर द्वारा दुर्गा दास फाउंडेशन तथा संगीत नाटक एकेडमी के सहयोग से तीन दिवसीय 42 वां वार्षिक चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के दूसरे दिन एक ओर जहां चंद्रिमा मजूमदार ने सरोद वादन से श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुति दी। वहीं दुसरी ओर रघुनंदन पणशीकर के गायन ने श्रोताओं का समां बांधे रखा तथा श्रोताओं से खूब प्रशंसा बटौरी।

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स्कूल, सैक्टर 26 में आयोजित इस संगीत सम्मेलन में चंद्रिमा मजूमदार ने सरोद वादन से शुरूआत की। उन्होंने अपनी प्रथम प्रस्तुति में राग श्याम कल्याण जिसमें विलम्बित तथा द्रुत तीनताल की बंदिशे थी को बखूबी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने इस राग में विस्तार से अलाप, जोड़ और झाला भी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत खूब प्रशंसा बटौरी। उन्होंने इसके पश्चात अपनी अगली प्रस्तुति राग झिंझोटी के साथ की थी। इस राग में झप्प ताल की एक गत को उन्होंने बखूबी प्रस्तुत किया। अंत में राग काफी पर आधारित कुछ पारम्परिक रचनाएं प्रस्तुत की।
https://www.youtube.com/watch?v=CFEjVaCp688
एक अच्छी कलाकार होने के साथ साथ  वह सरोद के शाहजहाँपुर घराने की एक योग्य पथप्रदर्शक भी हैं। उन्होंने लगभग दो दशकों तक प्रसिद्ध सरोदवादक पं. नरेंद्र एन धर के तहत कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह भारत के विभिन्न प्रतिष्ठित समारोहों में प्रदर्शन करती रही हैं।

इनकेे पश्चात् गायक  रघुनंदन पणशीकर ने अपने गायन का आरम्भ राग यमन, किशोरी अमोनकर द्वारा रचित विलम्बित बंदिश मोह मन लगन लगी श्रोताओं के समक्ष बखूबी प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा बटौरी। पणशीेकर ने इसके पश्चात राग नायकी कान्हड़ा में अपने जयपुर घराने की पारम्परिक बंदिश मेरो पिया प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने गायन का समापन एक सुंदर भजन के साथ किया।

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