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कोविड -19 महामारी के बढ़ते प्रकोप कारण जेलों में से 6000 कैदियों को छोड़ा जायेगा-सुखजिन्दर सिंह रंधावा

चंडीगढ़, 26 मार्च: कोविड -19 जैसी महामारी के बढ़ते प्रकोम के चलते राज्य की जेलों में कैदियों के दबाव घटाने के लिए 6000 के करीब कैदियों को छोड़ा जायेगा। यह जानकारी पंजाब के जेल मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने आज यहाँ जारी प्रैस बयान के द्वारा दी।

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स. रंधावा ने यह जानकारी देते हुये बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा सभी मापदण्डों और प्रक्रिया को ग्रहण करने के बाद यह फ़ैसला किया जिसके अंतर्गत दोषी कैदियों को छह सप्ताहों की पैरोल और हवालाती कैदियों को छह सप्ताहों की अंतरिम ज़मानत पर छोड़ा जायेगा। यह कमेटी पंजाब कानूनी सेवाएं अथॅारिटी के चेयरपर्सन की अध्यक्षता अधीन बनी थी जिसके मैंबर प्रमुख सचिव जेलें और ए.डी.जी.पी. जेलें थे।

 

जेल मंत्री ने आगे बताया कि राज्य की 24 जेलों में इस समय पर 24,000 कैदी हैं जबकि जेलों का सामथ्र्य 23,488 है। कमेटी की रिपोर्ट अनुसार सबसे प्रारंभिक उद्देश्य कोविड -19 के प्रकोप के चलते कैदियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना था जिससे एतिहात के तौर पर इसको फैलने से बचाया जा सके। इस आसाधारण समय में समाज के सर्वपक्षीय कल्याण और कानून व्यवस्था को कायम रखते हुए सिफारशें की गई।

 

कमेटी ने दोषी कैदियों को छह सप्ताह की पैरोल पर छोडऩे की सिफारशें की। कैदी जिनको अधिक से अधिक सात साल की सज़ा हुई हो और दो से अधिक मुकदमे न चल रहे हों। आखिरी पैरोल का शांतिपूर्वक लाभ वाले ऐसे कैदियों को पैरोल पर छोडऩे के लिए विचारा गया। जेल मंत्री ने आगे कहा कि पहले ही पैरोल पर गए कैदियों के एकांतवास को ध्यान में रखते हुये उनके पैरोल के समय में छह सप्ताह का विस्तार किया जायेगा। एक समय के उपाय के तौर पर सम्बन्धित जेल के सुपरडैंट को पैरोल केस की प्रक्रिया चलाने के लिए अधिकारित किया गया है जिससे पैरोल की प्रक्रिया तेज़ की जा सके।

 

 

हवालाती कैदी को छह सप्ताह की अंतरिम ज़मानत पर छोडऩे के लिए विचारा गया अगर वह एक या दो मामलों का सामना कर रहा है जिसमें अधिक से अधिक सज़ा सात साल की होती हो। आई.पी.सी. की धारा 498 -ए, 420, 406, 324, 325, 379, आबकारी एक्ट और सी.आर.पी.सी. की धारा 107 /151 अधीन आते विशेष मामलों के अंतर्गत भी ज़मानत के लिए विचारा जायेगा। अंतरिम ज़मानत की मंजूरी के लिए कैंप अदालतें जेलों के अंदर ही रखी जाएंगी।

 

 

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि पोक्सो एक्ट, आई.पी.सी. की धारा 376, 379 -बी, तेज़ाबी हमले, यू.ए.पी.ए., विस्फोटक एक्ट और विदेशी नागरिकों के अंतर्गत दोषी ठहराए या दोषों का सामना करने वालों को रिहा करने के लिए नहीं विचारा जायेगा। एन.डी.पी.एस. एक्ट के अधीन आते मामलों वाले कैदियों पर भी यही शर्तें रहेंगी। कमेटी ने एच.आई.वी., शुगर आदि गंभीर बीमारियों से पीडि़त कैदियों, गर्भवती महिलाओं और 65 साल की उम्र से अधिक वाले कैदियों के लिए शर्तंे में छूट दी।

 

जेलों में कानून व्यवस्था यकीनी बनाने के लिए डी.एल.सी.ए. चेयरपर्सन को कहा गया है कि वह ज़रूरी सावधानियां लेने के बाद कैदियों के साथ बातचीत के लिए वैकल्पिक दिन जेल में आएं। उन्होंने कहा कि जेलें और सुधार सेवाएंं विभाग योग्य कैदियों को पंजाब जेल मैनुअल के अनुसार छूट दे रहा है।

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर हवालाती कैदियों की फिजिकल पेशी अदालतों में रोक लगा दी है और वीडियो कॉनफे्रसिंग का सहारा लिया जा रहा है। अधिक सामथ्र्य वाली जेलों से अन्य जेलों में कैदियों का तबादला किया जा रहा है जिससे आपसी दूरी कायम रखी जा सके जो कि कोविड -19 के चलते सबसे ज़रूरी एहतियात है। जेल में जि़म्मेदार अधिकारी की हाजिऱी में वट्टसऐप वीडियो काल का प्रयोग के द्वारा वीडियो मुलाकात की आज्ञा दी जायेगी क्योंकि जेलों में फिजिकल मुलाकात बंद कर दी है।

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