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पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने दिया अकाली सरकार के पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा को जवाब

चंडीगढ,30नवम्बर। पंजाब सरकार द्वारा केन्द्र से जीएसटी मुआवजे के जल्दी भुगतान की मांग उठाए जाने पर अकाली सरकार के पूर्व मंत्री परमिंदर ढींढसा द्वारा कांग्रेस सरकार को आर्थिक मोर्चे पर नाकाम रहने का आरोप लगाए जाने के जवाब में वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने शनिवार को यहां कहा कि जीएसटी मुआवजा राज्य का हक है।

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मनप्रीत बादल ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य ने अपनी आर्थिक संप्रभंुता केन्द्र को सौंपी है। जब जीएसटी लागू किया गया तब पंजाब ने अनाज की बिक्री पर मिलने वाला 23 फीसदी कर जीएसटी में समाहित किया था। इस पर केन्द्र सरकार ने इसका मुआवजा देने का वायदा किया था। अब इसी मुआवजे के 4100 करोड रूपए बकाया है। यह राशि कम नहीं है। इससे राज्य के कर्मचारियों का दो माह का वेतन दिया जा सकता है। बादल ने कहा कि जीएसटी लागू करने के समय परमिंदर ढींढसा ने वित्त मंत्री पद पर रहते हुए अनाज की बिक्री पर मिलने वाले 23 फीसदी कर को समाहित करने के समझौते पर हस्ताक्षर कर गलती की थी।

 

 

मनप्रीत ने कहा कि पंजाब केन्द्र सरकार से कोई अन्यथा मुआवजा नहीं मांग रहा। संविधान में भी प्रावधान है कि अगर राज्य आर्थिक संकट में आयेगा तो केन्द्र को मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जीएसटी संग्रह घटा है। केन्द्र सरकार और राज्यों का संग्रह घटा है। हालांकि पंजाब का जीएसटी संग्रह अन्य राज्यों में सबसे अधिक दस फीसदी है। बादल ने कहा कि वे जीएसटी मुआवजे के मुद््दे पर सोमवार दोपहर मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के साथ बैठक करेंगे। विपक्ष शासित राज्यों के वित्त मंत्री मंगलवार को केन्द्र सरकार के समक्ष जीएसटी मुआवजा भुगतान की मांग रखेंगे।

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