अदब फाउंडेशन द्वारा दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफरोशी | Hindxpress

अदब फाउंडेशन द्वारा दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफरोशी  पीयूष मिश्रा सांस्कृतिक केंद्र, दीक्षान्त ग्लोबल स्कूल में आयोजित

अदब फाउंडेशन द्वारा दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफरोशी पीयूष मिश्रा सांस्कृतिक केंद्र, दीक्षान्त ग्लोबल स्कूल में आयोजित

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11 अगस्त चंडीगढ़/ज़ीरकपुर : काकोरी ट्रेन डकैती की वर्षगाँठ के अवसर पर , अदब फाउंडेशन ने स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और उनके और उनके युवा मित्र जिन्हें काकोरी षड़यंत्र रचने के लिये सजा दी गई थी ,पर आधारित एक म्यूजिकल शो दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफरोशी का आयोजन किया । यह कार्यक्रम 11 अगस्त को पीयूष मिश्रा सांस्कृतिक केंद्र, दीक्षान्त ग्लोबल स्कूल परिसर, वीआईपी रोड, ज़ीरकपुर में आयोजित किया गया था।

यह शो एक भावनात्मक संगीतमय यात्रा थी, जिसे हिमांशु बाजपेई ने भावपूर्ण ढंग से लिखा और सुनाया / अशफाक और बिस्मिल पर आधारित कविता के रूप में रचित शो को वेदांत भारद्वाज द्वारा खूबसूरती से गाया गया ; तबले पर उनका साथ दे रहे थे लखनऊ घराने के युवा कलाकर शिवार्घ भट्टाचार्य ,जो पूरी लय व तन्मयता के साथ दर्शकों की तालियां बटोर रहे थे ।

“शो दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफरोशी अनुसंधान और तथ्यात्मक कहानी का सही मिश्रण था और आज के राजनीतिक परिदृश्य के लिए इसकी बहुत प्रासंगिकता थी। घटना से हटकर , दास्तानगोई में अशफाक और बिस्मिल के विचारों के बारे में बात की, जिनकी दोस्ती राष्ट्र के सम्मान के लिए हिंदू मुस्लिम एकीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ” मितुल दीक्षित, अध्यक्ष अदब फाउंडेशन ने बताया।

गौरतलब है की काकोरी कांड : जिसने देश में क्रांतिकारियों के प्रति जनता का नजरिया बदल दिया था। नौ अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड का मुकदमा 10 महीने तक चला था जिसमें रामप्रसाद ‘बिस्मिल’, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह और अशफाक उल्लाह खां को फांसी की सजा हुई।

भारत के स्वाधीनता आंदोलन में काकोरी कांड की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. लेकिन इसके बारे में बहुत ज्यादा जिक्र सुनने को नहीं मिलता. इसकी वजह यह है कि इतिहासकारों ने काकोरी कांड को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं दी. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि काकोरी कांड ही वह घटना थी जिसके बाद देश में क्रांतिकारियों के प्रति लोगों का नजरिया बदलने लगा था और वे पहले से ज्यादा लोकप्रिय होने लगे थे।

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