Home / Haryana / धान बुआई पर पाबंदी के ख़िलाफ़ किसानों के बीच जाएंगे नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा

धान बुआई पर पाबंदी के ख़िलाफ़ किसानों के बीच जाएंगे नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा

चंडीगढ़ 27 मईः पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार को एक जून तक का अल्टीमेटम दिया है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि 31 मई तक लगे लोक डाउन के बाद भी अगर सरकार एक जून तक धान पर पाबंदी के फ़ैसले को वापस नहीं लेती है तो वो किसानों के बीच जाकर इसका विरोध करेंगे। कुरुक्षेत्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया जाएगा। हुड्डा कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद समेत धान पाबंदी वाले तमाम इलाक़ों के किसानों से मुलाक़ात करेंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी हुई है। सरकार को किसान की हालत और हालात की गंभीरता को समझना चाहिए। महामारी के दौर में खेती व किसान के साथ नए-नए प्रयोग करने के बजाय उन्हें राहत देनी चाहिए। हुड्डा ने कहा कि कोई भी किसान सरकार की थोपी गई शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उन्हें बेझिझक होकर धान की बुआई करनी चाहिए। किसान के हर संघर्ष में हम उनके साथ खड़े हैं। सरकार को कोई अधिकार नहीं बनता है कि वो किसान द्वारा बोई गई फसल को एमएसपी पर ख़रीदने से इंकार कर दे। अगर सरकार ऐसा करती है तो हम निश्चित तौर पर इसका विरोध करेंगे।

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एक ज़िम्मेदार विपक्ष होने के नाते हमें किसान और भूजल दोनों की चिंता है। इसलिए हम लगातार सरकार को सुझाव दे रहे हैं कि कैसे किसान और भूजल दोनों को बचाया जा सकता है। सरकार को भी भूजल संरक्षण की योजनाओं के प्रति सकारात्मक रुख़ अपनाते हुए उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए। उसे डीएसआर पद्धति और हाईब्रिड बीजों से धान की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। इससे कम वक्त और कम पानी में धान की अच्छी फसल ली जा सकती है। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान भी सरकार के सामने भूजल की चुनौती थी। लेकिन उस वक्त सरकार ने किसानों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई थी। हमने दादूपुर नलवी, हांसी बुटाना नहर परियोजना चलाने, राखसी नदी, खंड नाला को पुनर्जीवित करने, सिरसा में ओटू,मेवात में कोटला झील बनवाने, इज़राइली ड्रिप सिस्टम से सिंचाई को बढ़ावा देने जैसे क़दम उठाए थे। ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए फव्वारा सेट के 12 से 22 हज़ार रुपये तक और पाइप लाइन के लिए 60 हज़ार रुपये किसानों को अनुदान दिया जाता था। लेकिन बीजेपी सरकार ने उसे भी अभी लगभग बंद कर दिया। हमने ज़्यादा पानी लेने वाली साठी धान ना बोने के लिए किसानों को प्रेरित किया। दूसरी धान के ऊंचे रेट दिए। इस वजह से आज कोई किसान साठी धान नहीं बोता। सरकार को नई-नई परियोजनाओं, जागरुकता और प्रोत्साहन का काम साथ-साथ करना होगा। तभी किसान और भूजल दोनों को बचाया जा सकेगा।

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