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जिला अदालतों के फैसले हिन्दी में लिखाने के हरियाणा के कदम का भारतीय भाषा अभियान ने किया स्वागत

चंडीगढ,12जनवरी। लम्बे समय से सभी अदालतों के फैसले और कार्यवाही को भारतीय भाषाओं में दर्ज कराने के लिए मुहिम चला रहे भारतीय भाषा अभियान ने हाल में हरियाणा केबिनेट के जिला अदालतों के फैसले हिन्दी में लिखाए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए ऐलान किया है कि अब पंजाब में निचली अदालतों के फैसले और कार्यवाही को पंजाबी में दर्ज कराने के लिए मुहिम शुरू की जायेगी।

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भारतीय भाषा अभियान के राष्ट््ीय संयोजक और एडवोकेट अरूण भारद्वाज एवं उत्तर क्षेत्र संयोजक विशाल जॉली ने रविवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाएं दर्ज है। सर्वोच्च न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और निचली अदालतों तक समूची कार्यवाही एवं फैसले इन्हीं भारतीय भाषाओं में दर्ज की जाना चाहिए। इससे न्याय के याचियों को अदालत में अपनी बात रखने में सहूलियत होगी और न्याय भी सही ढंग से दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अभी सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में अंग्रेजी में न्यायिक कार्य किया जाता है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 348 में अंग्रेजी में न्यायिक कार्य किए जाने की अनुमति नहीं है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने निचली अदालतों का कामकाज हिन्दी में कराने के फैसले के बाद अब राष्ट््पति से हाईकोर्ट का कामकाज भी हिन्दी में शुरू कराने के लिए अनुमति मांगी है। अब तक देश के चार राज्यों मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश,राजस्थान और बिहार में हाईकोर्ट व निचली अदालतों में हिन्दी में कामकाज किया जा रहा है। इनके अलावा कर्नाटक,तमिलनाडु और गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट और निचली अदालतों में अपने प्रदेश की भाषाओं में काम शुरू कराने के लिए राष्ट््पति से अनुमति मांगी है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 348 में इस तरह से बदलाव कराया जाना है ताकि अदालतों का कामकाज भारतीय भाषाओं कराया जाना अनिवार्य किया जाए। इसके लिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुवाद छह भारतीय भाषाओं में कराए जाने की व्यवस्था लागू है।

भारद्वाज और कौशिक ने बताया कि मूल भारतीय भाषा में अदालती कार्यवाही को लाने से पक्षकारों के बयान उनके सही भाव के मुताबिक दर्ज किए जा सकेंगे। अभी याची या गवाह का अपनी भाषा में दिया गया बयान अंग्रेजी में हूबहू रूपांतरित नहीं हो पाता। वकील और न्यायाधीश भाषा के विशेषज्ञ भी नहीं होते है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में हिन्दी में अदालती कार्य शुरू कराने के लिए अभियान पिछले पांच वर्ष से मुहिम चला रहा था। इस मुहिम को हरियाणा सरकार के फैसले के साथ सफलता मिली है।

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