संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून निरस्त करने की मांग को लेकर दिया धरना, सौंपा ज्ञापन

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झज्जर (सुमित कुमार)। हरियाणा सरकार द्वारा हाल हीं में बनाए गए संपति क्षति कानून को निरस्त करने को लेकर मंगलवार को किसानों ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर लघु सचिवालय में धरना दिया और अपनी मांगों का एक ज्ञापन महामहिम राष्ष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन के अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन सौंपने से पूर्व सभी सक्रिय किसान संगठन,ट्रेड यूनियन,कर्मचारी संगठन,जन संगठन व नागरिक समूह यहां लघु सचिवालय के पास ग्रीन बैल्ट में एकत्रित हुए और बाद में सभी इस कानून को निरस्त करने की मांग को लेकर यहां धरना दिया और बाद में डीआरओ को अपना ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति के नाम सौंपा। ज्ञापन सौंपने वाले इन संगठन के नेताओं का कहना था कि हाल हीं में हरियाणा सरकार ने जो संपति क्षति कानून बनाया है वह लोकतंत्र पर एक तरह से कुठाराघात है और अभिव्यक्ति का हनन करता है।

 

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ज्ञापन में कहा कि संपति क्षति के सम्बन्ध में पहले ही भारतीय दंड संहिता में धाराएं है। ऐसे में इस नए कानून का कोई औचित्य नहीं बनता। उनका यह भी कहना कि मौजूदा समय में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा आंदोलन चलाए जा रहे है। ऐसे में इस आंदोलन को कुलचने का प्रयास इस कानून से किया जा रहा है।

 

 

इनके अलावा संगठनों का यह भी कहना था कि हरियाणा में किसान संगठनों, मजदूरों के शांतिपूर्वक चल रहे आंदोलनों पर पुलिस बल का प्रयोग किया जाना निरन्तर बढ़ रहा है। जोकि लोकतंत्र के लिए घातक है। ज्ञापन में संपति क्षति पूर्ति कानून रद्द करने,पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों पर बनाए गए मामले वापिस लिए जाने व किसानों की मांग स्वीकार कर आंदोलन पर दमन बंद किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।

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