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हरियाणा रोडवेज के लिए किराया प्रणाली की बसों का मुद्दा फिर सरकार के सामने आया

चंडीगढ,17दिसम्बर। हरियाणा रोडवेज के लिए निजी बसें किराए पर लेने के पिछली भाजपा सरकार के फैसले ने दूसरी भाजपा सरकार को भी घेर लिया है। रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के नेताओं ने मंगलवार को यहां राज्य के परिवहन मंत्री के साथ मुलाकात में मांग की कि किराया प्रणाली से निजी बसें लेने के बजाय रोडवेज के बेडे में खरीदी गई बसें शामिल की जाएं।

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परिवहन मंत्री मूलचन्द शर्मा ने रोडवेज कर्मचारी नेताओं से बातचीत के बाद मीडिया को बताया कि बातचीत में पिछली सरकार द्वारा रोडवेज के बेडे में प्रति किलोमीटर किराया दर पर निजी बसें शामिल करने के फैसले को उठाया गया था। कर्मचारी नेताओं ने मांग की कि इस योजना को रद््द कर रोडवेज के बेडे के लिए नई बसें खरीदी जाएं। शर्मा ने बताया कि यह योजना अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। लेकिन रोडवेज के लिए नई बसें खरीदने का फैसला भी किया गया है। अभी करीब 375 बसें खरीदने का फैसला किया गया है। धीरे-धीरे और बसें खरीदी जायेंगी। उन्होंने बताया कि अभी रोडवेज में 500 कर्मचारी बगैर बस के बैठे है। इनके लिए बसों की व्यवस्था की जायेगी। रोडवेज में कहीं कम और कहीं ज्यादा कर्मचारी है। इन्हें संतुलित किया जाएगा। हरियाणा में रोडवेज बसों का किराया सबसे कम है। साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढने के बावजूद वर्ष 2016 से किराया नहीं बढाया गया है।

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शर्मा ने बताया कि बातचीत में कर्मचारी नेताओं ने पिछले आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें पेश की।हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के सदस्य सरबत पूनिया ने कहा कि परिवहन मंत्री का रूख सकारात्मक रहा है। उन्होंने मांगों के हल के लिए जल्दी ही अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने का आश्वासन दिया है। किलोमीटर योजना के तहत बसें किराए पर लेने और 365 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की गई। ओवर टाइम,जोखिम भत्ता,बोनस,तकनीकी भत्ता,बोनस बहाल करने की मांग की गई।

 

रोडवेज अनुसूचितजाति कर्मचारी संघ के पूर्व महासचिव मनोज चहल ने कहा कि रोडवेज को दस हजार बसों की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने रोडवेज में पदोन्नति में आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इसलिए वर्ष 1995 से लम्बित पदोन्नति में आरक्षण का बैकलाग पूरा करने की मांग की गई।

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