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हरियाणा के राइस मिलर्स 54 लाख टन धान बगैर मिलिंग सरकार को लौटाने को तैयार

चंडीगढ,17दिसम्बर। हरियाणा के राइस मिलर्स और सरकार के बीच धान के भौतिक सत्यापन को लेकर बिगडी बात में कोई बदलाव नहीं हुआ है। राइस मिलर्स ने धान की मिलिंग को लेकर सरकार के साथ चला आ रहा अनुबंध समाप्त करने का ऐलान सोमवार को किया था। इसके बाद दूसरे दिन मंगलवार को स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। राइस मिलर्स सरकार के लिए खरीदी गई 64 लाख टन धान में से 10 लाख टन तो मिलिंग के बाद सरकार को दे चुके है। अब बगैर मिलिंग बची 54 लाख टन धान मिलर्स सरकार को लौटाने को तैयार है।
राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सोमवार को घरौंडा में आयोजित बैठक में फैसला किया था कि वे मिलों में धान के स्टॉक के तीसरे भौतिक सत्यापन के सरकार के फैसले के विरोध में धान मिलिंग के सरकार के साथ चले रहे अनुबंध को समाप्त करते है। एसोसिएशन के इस फैसले के साथ ही मंगलवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर उपायुक्तों को विरोध में ज्ञापन सौंपने का फैसला भी किया गया था। इस फैसले के तहत मंगलवार को ज्ञापन सौंपे गए।
हरियाणा में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है। राइस मिलर्स और सरकार के बीच गतिरोध के चलते सरकार की ओर से कोई पहल मंगलवार को नहीं की गई। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला स्वयं मंगलवार को दिल्ली के दौरे पर थे। राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्वेल सिंगला ने मंगलवार को कुरूक्षेत्र से फोन पर बताया कि एसोसिएशन और सरकार के बीच अंतिम बातचीत पिछले रविवार को दिल्ली में हुई थी। इसके बाद सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं हुई। एसोसिएशन ने सोमवार को सरकार के साथ धान मिलिंग का अनुबंध तोडने का ऐलान किया था। इसके बाद सरकार की ओर से बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि बातचीत का कोई मतलब नहीं है। बातचीत में अधिकारी मुख्यमंत्री के सामने मिलर्स को अपमानित करते है। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति तय करने के लिए अब बुधवार को एसोसिएशन की बैठक आयोजित की जाएगी।
उधर जानकार सूत्रों ने बताया कि सरकार के साथ पिछले रविवार को दिल्ली में आयोजित राइस मिलर्स की वार्ता में मिलर्स को कहा गया था कि वे धान का स्टॉक पूरा कर लें। इसके बाद 19 दिसम्बर को तीसरा भौतिक सत्यापन किया जाएगा। मिलर्स और सरकार के बीच विवाद की शुरूआत तब हुई थी जबकि सरकार को शिकायत मिली थी कि मिलर्स और अधिकारियों ने धान की पूरी खरीद नहीं की है और कागजों में दिखाई गई धान की खरीद का कोटा बाहर से मंगाए जाने वाले सस्ते चावल से पूरा किया जाएगा। इसके बाद सरकार ने मिलों में धान के स्टॉक का भोतिक सत्यापन दो बार कराया था। इसमें भी अधिकारियों और मिलर्स की मिलीभगत की शिकायत सामने आने पर तीसरा भोतिक सत्यापन कराने का फैसला किया गया था।

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