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राज्य कर्मचारियों को विधानसभा चुनाव से पूर्व खुश करने का हरियाणा सरकार का प्रयास कामयाब नहीं हुआ !

चंडीगढ,21 जुलाई। आगामी अक्टूबर माह में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा की भाजपा सरकार ने राज्य कर्मचारियों को खुश करने का प्रयास किया लेकिन यह कामयाब नहीं हुआ। यहां शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल और राज्य कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ लम्बी वार्ता में कुछ मांगों पर सहमति बनी और कुछ पर फैसला नहीं किया जा सका।

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वार्ता के बाद जहां मुख्यमंत्री ने प्रमुख मांगें मंजूर कर लिए जाने की जानकारी पत्रकारों को दी वहीं कर्मचारी संगठनों की ओर से जारी बयान में कहा कि कुछ मांगें मंजूर नहीं की गई है। इसलिए जिला स्तर पर प्रदर्शन किए जायेंगे और उपायुक्तों के जरिए मांगों के ज्ञापन मुख्यमंत्री को भिजवाए जायेंगे। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के नेताओं ने बताया कि वार्ता में कुछ मांगों पर सहमति बनी और कुछ को बाकी छोड दिया गया है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने,कच्चे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने,जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार मकान किराया भत्ता देने जैसी मांगें छोड दी गई है।

उधर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि एक अगस्त 2019 से मकान किराया भत्ता देना तय किया गया है। समान काम के लिए समान वेतन नीति नवम्बर 2017 से लागू करना तय हुआ। कच्चे कर्मचारियों को भी हटाया नहीं जाएगा और उन्हें नियमित भर्ती में आने के लिए मौका दिया जाएगा। इसके तहत दस साल की सेवा पर अनुभव आधार पर इन्हें पांच अंक दिए जायेंगे। हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित इन कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखा जायेगा लेकिन वे स्थायी की श्रेणी में नहीं आ पायेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा केन्द्र सरकार का है और इससे केन्द्र को अवगत कराया जाएगा। गेस्ट टीचर भी सेवा से नहीं हटाए जायेंगे। इन्डोर इलाज को कैशलैस किया जाएगा। आउटसोर्स के प्रथम भाग के तहत कार्यरत महिला कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 1996 से एक्सग्रेसिया बन्द था और इसे अब एक अगस्त 2019 से लागू किया जा रहा है। इसके तहत मृतक कर्मचारी के आश्रित के लिए दो विकल्प होंगे। पहला तो यह कि वह मृतक कर्मचारी की शेष सेवाकाल का वेतन ले या फिर योग्यता के अनुसार नियुक्ति ले। मृतक कर्मचारी ने 52 वर्ष की उम्र पूरी की हो। पुलिस कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पंजाब के समान वेतनमान की मांग के बारे में बताया कि वार्ता में बता दिया गया कि यदि उसे लागू किया जाता है तो कहीं तो वेतनमान बढेगा और कहीं घट जायेगा। ऐसे में नुकसान भी होगा। अब कर्मचारी संगठनों पर है कि वे ऐसी हालत में मांग को उठाते हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की इन मांगों को मंजूर करने से राज्य सरकार पर 1900 करोड रूपए सालाना का खर्च आएगा।

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