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किसान आन्दोलन में देश के किसानों के लिए खलनायक के रूप में उभरी हरियाणा सरकार: दीपेन्द्र हुड्डा

जींद(रोहताश भोला )। राज्य सभा सांसद दीपेन्द्र हुड्डा जींद के कई सामजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बातचीत में कहा कि किसान आन्दोलन में देश के किसानों के लिए हरियाणा सरकार खलनायक के रूप में उभरी है। किसान नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार किया गया। कोई भी हिंसक घटना नहीं हुई फिर भी 10 हज़ार किसानों के खिलाफ केस दर्ज कर दिए। देशभर के किसानों में हरियाणा सरकार के इन क़दमों से गुस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत से पहले बातचीत का माहौल बनाए। इसके लिए जरूरी है कि किसानों पर दर्ज झूठे मुकदमें तुरंत रद्द किये जाएँ और गिरफ्तार किसान नेताओं को तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार को चेताया कि वो किसानों के भोलेपन का फायदा उठाने की कोशिश न करे। ये भी पढ़ें : – गृहमंत्री अनिल विज का किसान आंदोलन को लेकर बड़ा बयान ,बोले -गिनती के पहुंचे है हरियाणा के किसान

 

 

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से आन्दोलनरत किसानों को देश में कहीं किसी ने नहीं रोका, लेकिन हरियाणा की सरकार ने उन्हें बलपूर्वक रोका, वाटर कैनन की बौछारें और आंसू गैस के गोले मारे और हजारों बेगुनाह किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए। सांसद दीपेन्द्र ने कहा कि ये पहली सरकार है जो किसानों को प्रताड़ित करने में नंबर-1 है और किसानों पर मुकदमे दर्ज करने में भी नंबर-1 साबित हो गयी है। क्योंकि, 10 हजार किसानों पर एक साथ मुकदमा इससे पहले कभी दर्ज नहीं हुआ था।

 

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि केंद्र और खासकर हरियाणा सरकार का रवैया किसानों के प्रति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। सरकार का काम रास्ते खोलना है, रास्ते रोकना नहीं। सरकार का काम सड़क बनाना होता है, सड़क खोदना नहीं। हरियाणा सरकार बताए कि आखिर किसानों का गुनाह क्या है। उन्होंने आगे कहा कि सामान्य तौर पर देखा जाता था कि आंदोलनकारी रास्ता रोकते थे और सरकार रास्ता खोलती थी। देश के इतिहास में पहली बार ये हो रहा है कि सरकार रास्ते बंद कर रही है और आंदोलनकारी किसान रास्ते खोल रहे हैं। ये भी पढ़ें : -किसानों ने मंत्री जी को दिखाए काले झंडे, जमकर की नारेबाजी

 

 

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि एक तरफ सरकार कह रही है कि वो बातचीत के लिए तैयार है और दूसरी तरफ इन तीन किसान विरोधी कानूनों को सही ठहरा रही है। यही कारण है कि किसानों को सरकार की जुबानी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और एमएसपी से कम पर खरीदने वाले के लिए सजा का प्रावधान जब तक नहीं होगा तब तक किसी क़ानून का किसानों के लिए कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग करी कि सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़े और किसानों की सभी मांगों को स्वीकार करे।

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