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खेतों से फसल खरीद का सुझाव सरकार ने नहीं माना – चौधरी अभय सिंह चौटाला

चंडीगढ़, 23 अप्रैल:। हरियाणा में इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने वीरवार को यहां कहा कि उन्होंने सरकार को अवगत कराया था कि किसानों की सरसों व गेहूं की फसलों को खेतों से ही खरीदा जाए तो किसानों, व्यापारियों और खरीद एजेंसी के अधिकारियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सकता है परंतु सरकार ने सुझाव पर उत्सुकता नहीं दिखाई। उल्टा सरकार किसानों को कभी 25 तो कभी 40 क्विंटल सरसों व गेहूं मंडियों में लाने की सीमा तय करती रही है जिससे किसानों की परेशानियां और ज़्यादा बढ़ रही हैं।

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अब खरीद के लिए किसान से 32 किलो सरसों मंगवाई

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान व आढती के बीच की दरार को बढ़ा कर गेहूं व सरसों की खऱीद में अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया है। खऱीद एजेंसियों और प्रशासन द्वारा किसानों को बताया जा रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की शर्तों की बजाय खऱीद सरकार के आदेशानुसार करेंगे। हद तो तब हो गई जब सिरसा जिले के एक किसान को केवल 32 किलो सरसों ही मंडी में लाने का संदेश भेजा गया। किसान की फसल समय पर और अच्छे दामों पर चाहे बिके या न बिके परंतु सरकार प्रदेश में शराब के धंधे को बढ़ावा देने में ज़्यादा उत्सुक है, ।

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उन्होंने कहा कि किसानों व व्यापारियों के साथ ज्यादती को देखते हुए मजबूरीवश उनको मंडियों का दौरा करना पड़ा। इनेलो नेता ने बताया कि कांग्रेस सरकार के शासनकाल के दौरान विपक्ष की नेता रही श्रीमती सुषमा स्वराज द्वारा संसद में किसानों और आढतियों के आपसी आर्थिक संबंध व सहभागिता बारे में जो वक्तव्य दिया था उस बारे भी सरकार को अवगत करवाया था। परंतु प्रदेश की भाजपा-जजपा की सरकार किसान और आढती के भाईचारे को तोड़ऩे पर आमदा है।

आज प्रदेश का हर छोटा-बड़ा दुकानदा,व्यापारी,किसान और आढती सरकार के रुखे रवैये से परेशान होकर दुखी मन से मजबूरन मंडियों में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं,। अब ऐसे में ‘सोशल डिस्टेंस’ कैसे मेंटेन हो, इस पर भी सरकार को जनता के प्रति सही रास्ता अख्तियार करना चाहिए। सरकार का आपसी तालमेल ही नहीं है,। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस महामारी को लेकर कह रहे हैं ‘घर-घर जाकर सबकी जांच संभव नहीं’और स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं ‘हरियाणा में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी’।

इनेलो नेता ने कहा कि मुझे भी सरकार की तरफ से संदेश आया है कि मैं एक बार में मात्र 5 क्विंटल 2 किलो गेहूं मंडी में लेकर आ सकता हूं। ऐसे में मेरी कुल 75 एकड़ की गेहूं की फसल को मंडी में बेचने के लिए मुझे तो साल तक इंतजार करना पड़ेगा। सरकार कह रही है कि हमने किसानों की सुविधाओं के लिए प्रदेश में मंडियां की संख्या बढ़ा दी है, परंतु वास्तविकता तो यह है कि सरकार यह बताने का कष्ट करे अब तक कितनी मंडियों में सरसों व गेहूं की खरीद चालू हैं। वर्ष 2014 के गेहूं के सीजन में जो भाजपा के किसान नेता नंगे बदन कांग्रेसी सरकार को गेहूं की खऱीद न करने पर पानी पी पी कर कोसते थे वह आज मंडियों में दिखाई नहीं देते। नंगे बदन न सही कपड़े पहन कर ही उनकी सरकार के विरुद्ध किसानों व व्यापारियों के साथ हो रही ज़्यादतियों के बारे अपनी आवाज बुलंद करे। इस मुश्किल की घड़ी में सरकार को अपनी जिद छोडक़र नरमी का सहारा लेकर सरसों व गेहूं की खऱीद की तरफ ध्यान देना चाहिए। सरकार कोई व्यापारी की दुकान नहीं जो नफे-नुक़सान का जायजा ले परंतु सरकार का तो लोगों की भलाई के बारे सोचना ही प्रथम कर्तव्य है।

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