Home / Haryana / जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है किसान, सरकार ने ख़ुद किया सड़क पर आने के लिए मजबूर- हुड्डा

जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है किसान, सरकार ने ख़ुद किया सड़क पर आने के लिए मजबूर- हुड्डा

चंडीगढ़,10 सितंबर : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुरुक्षेत्र के पीपली में होने वाली किसान रैली में जा रहे किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आक्रोश ज़ाहिर किया है। हुड्डा का कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को लठतंत्र से दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी आवाज़ उठाने और कहीं भी जाने का अधिकार है। वो ख़ुद शुक्रवार को पिपली कुरुक्षेत्र जाएंगे और किसान, मजदूर और आढ़तियों से मुलाक़ात करेंगे।अन्नदाता अपनी जायज़ मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कोरोना काल में किसान विरोधी 3 अध्यादेश लाकर सरकार ने ख़ुद किसान को सड़क पर आने के लिए मजबूर किया है। बिना सदन में चर्चा और MSP की गारंटी के कोई भी अध्यादेश किसानहित में नहीं हो सकता। अगर सरकार व्यवस्था में कोई परिवर्तन करना चाहती है तो उसे मंडी और MSP व्यवस्था के संरक्षण की गारंटी देनी होगी। बीजेपी को अपने वादे के मुताबिक़ लागत और स्वामीनाथन के सी2 फार्मूले पर MSP देनी होगी।

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार कोरोना का हवाला देकर किसान की आवाज़ दबाना चाहती है। लेकिन वो इसी कोरोना काल में किसानों पर 3 अध्यादेश थोप रही है। अगर उसे किसान और कोरोना की इतनी ही चिंता है तो वो 3 अध्यादेशों को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखा रही है। एक तरफ बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार किसानों को चौतरफ़ा मार मारने में लगी है और दूसरी तरफ़ वो किसान को रोने भी नहीं देती। किसान जब भी अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करता है तो उसे लाठियों से दबाने की कोशिश की जाती है। वीरवार को कुरुक्षेत्र में जो हुआ, वह ना सिर्फ अलोकतांत्रिक बल्कि अमानवीय भी है। अन्नदाता 135 करोड़ भारतीयों का पेट भरता है। उसके पेट या शरीर पर लाठी चलाने का अधिकार किसी को नहीं है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में हुए आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ व पूर्व मंत्री अरोड़ा और विधायक मेवासिंह के साथ सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ गिरफ्तारी भी दी। किसानों के हर आंदोलन और संघर्ष में कांग्रेस उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। किसान विरोधी 3 अध्यादेशों को तब तक लागू नहीं होने दिया जाएगा, जब तक इसमें MSP की गारंटी शामिल ना हो। इसके लिए बेशक सरकार को चौथा अध्यादेश लाना पड़े, जिसमें प्रावधान हो कि MSP से कम रेट पर ख़रीदने वाली एजेंसी पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक इन अध्यादेशों का विरोध जारी रहेगा।

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