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एक माह में हार के कारणों पर मंथन से ही बाहर नहीं निकल पाई गठबन्धन सरकार- हुड्डा

*मै बताता हूं चुनावी वायदे पूरे न करने से हाशिए पर आई भाजपा
*इस बार भी रवैया नहीं बदला तो 2014 वाली स्थिति लौट आयेगी

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चंडीगढ,27नवम्बर। हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को यहां प्रदेश की मौजूदा भाजपा-जजपा गठबन्धन सरकार पर करारा तंज कसा और कहा कि सरकार का नेतृृत्व कर रही भाजपा एक माह में भी अपनी हार के कारणों पर मंथन पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा इसके बजाय जनता के काम शुरू करे। हार के कारण तो मैं बता देता हूं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के वायदे पूरे न करने के कारण भाजपा इस चुनाव में हाशिए पर आ गई और अगर इस बार भी समय पर वायदे पूरे नहीं किए तो भाजपा वर्ष 2014 के स्थिति में लौट जायेगी।

 

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। हुड्डा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मेरा एक सवाल और है कि अभी भाजपा एवं जजपा ने गठबन्धन सरकार बनाई है तो क्या अगला चुनाव दोनों पार्टियां मिलकर लडेंगी। उन्होंने कहा कि इस सरकार के लक्षण तो अभी से दिखाई दे रहे हैं कि जब एक माह गुजर जाने के बाद भी भाजपा और जजपा अपना न्यूनतम साझा कार्यक्रम नहीं तय कर पाये तो लोगों का भला क्या करेंगे।

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हुड्डा ने एक माह पुरानी भाजपा-जजपा गठबन्धन पर सवाल उठाते हुए धान की खरीद में बडे घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सरकार धान की सही खरीद तय नहीं कर पाई है। धान खरीद घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जाना चाहिए। किसान को तो न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रही। धान घोटाले के आरोप के अलावा हुड्डा ने खान घोटाले और रोडवेज के प्रति किलोमीटर टेंडर घोटाले का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रति किलोमीटर टेंडर घोटाले की विजिलेंस जांच में कोई नतीजा नहीं निकला।

 

किसानों के मुद्दे उठाते हुए हुड्डा ने कहा कि यह माना जा सकता है कि धान के खेतों में पराली जलाने से करीब दस फीसदी वायु प्रदूषण होता है। लेकिन किसानों के खिलाफ मुकदमों और जुर्माने की कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए किसानों की मदद की जाना चाहिए। सरकार उन धान की किस्मों पर मदद नहीं दे रही जिनकी पैदावार ज्यादा है। गन्ने मूल्य जहां का तहां रखा गया है। कम से कम 375 रूपए प्रति क्विंटल गन्ने का दाम तय किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी में हरियाणा देश में नम्बर एक है। सरकारी नौकरियों में हरियाणा और हरियाणा के बाहर के आशार्थियों को आर्थिक आधार पर पांच अंक दिए जा रहे है। इस तरह हरियाणा के आशार्थियों को कैसे तरजीह मिलेगी।

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