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दीपेंद्र हुड्डा का खट्टर सरकार पर वार, लोगों की जान जोखिम में डाल कुर्सी बचाने में जुटी भाजपा सरकार

16 जून, चंडीगढ़ः राज्यसभा सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सरकार आज जनता की जान बचाने की बजाए, अपनी कुर्सी बचाने में लगी है। दीपेंद्र ने सवाल उठाया कि महामारी के दौर में जनता को राम भरोसे छोड़कर आख़िर बीजेपी प्रदेशभर में राजनीतिक रैलियां कर किस बात का जश्न मना रही है? क्या कोरोना से लड़ाई ख़त्म हो चुकी है? या कोरोना के मामलों में तेज़ी आने का जश्न मनाया जा रहा है? या कोरोना काल में लोगों की जानें और नौकरियां जाने का जश्न मनाया जा रहा है? या प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बेरोज़गारी का जश्न मनाया जा रहा है? या पूरे देश में सीएम खट्टर के सबसे कम लोकप्रिय मुख्यमंत्री बनने की ख़ुशी मनाई जा रही है?

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दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ बीजेपी सरकार की विफलताएं उजागर की। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में कोरोना के मामले सबसे तेज़ गति से बढ़ रहे हैं। सिर्फ 8 दिन में केस डबल हो रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार इसकी चिंता किए बिना राजनीतिक प्रचार में जुटी है। बीजेपी को लोगों के स्वास्थ्य और जान से ज़्यादा बरोदा उपचुनाव की चिंता है। इसलिए उसके सांसद और मंत्री कभी बरोदा तो कभी गोहाना में राजनीतिक सभाएं कर रहे हैं। जबकि MHA की गाइडलाइंस में साफ लिखा गया है कि अभी भीड़ जुटाने वाले सभी सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों पर पाबंदी है। दीपेंद्र ने सवाल उठाया कि सरकार को अचानक बरोदा की याद कैसे आ गई? 6 साल में कोई मंत्री या मुख्यमंत्री बरोदा क्यों नहीं आए? क्या बरोदा पहले हरियाणा का हिस्सा नहीं था? इस सरकार को ना बरोदा की चिंता पहले थी और ना आज है। क्योंकि आज भी महज़ राजनीति चमकाने के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे बरोदा की जनता बख़ूबी समझ रही है।

 

सांसद दीपेंद्र ने चेतावनी दी कि बरोदा की जनता बीजेपी को उपचुनाव में मुंह तोड़ जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि इस उपचुनाव से इस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। बरोदा ही नहीं पूरे प्रदेश की जनता मानती है कि इस सरकार की विफलताओं की फेहरिस्त इसकी सफलताओं से कहीं ज्यादा बड़ी है। उसको गिनवाने के लिए जन आंदोलन किया जा सकता है। लेकिन दीपेंद्र ने कहा कि वो संक्रमण के इस दौर में कोई ऐसा क़दम नहीं उठाएंगे जिससे लोगों की जान से खिलवाड़ हो। उन्होंने सरकार को भी संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी। सांसद दीपेंद्र ने चिंता जताई कि हरियाणा के साथ लगती दिल्ली में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं और हरियाणा की तमाम सीमाएं खोल दी गई हैं। जब प्रदेश में दर्जनभर केस थे तो तमाम सीमाएं सील थीं और आंकड़ा 8 हज़ार को छू रहा है तो आवाजाही सामान्य कर दी गई है। प्रदेश सरकार को इसके लिए कोई नीति बनानी चाहिए ताकि अन्य राज्यों से संक्रमण हरियाणा की तरफ ना आ पाए। जिस तरह से केंद्रीय गृह मंत्री ने दिल्ली में सक्रियता दिखाई है, उसी तरह हरियाणा पर भी ध्यान देना चाहिए। दिल्ली की तरह हरियाणा में भी टेस्टिंग ट्रिपल और रेट आधे करने चाहिए। कायदे से तो प्रदेश सरकार को भी इसके लिए केंद्र से ख़ुद ही मांग करनी चाहिए थी। लेकिन लगता है कि सरकार हरियाणा में दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे हालात होने का इंतज़ार कर रही है। शायद उसे हरियाणा के श्मशान घाटों में भी कतारें लगने का इंतज़ार है।

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29 फरवरी को हरियाणा सरकार ने 1 लाख 42 हजार करोड़ का बजट पेश किया, जिसका ख़र्च अप्रैल से शुरू होना था। 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू हुआ और आर्थिक गतिविधियां बंद हुईं। लेकिन अप्रैल शुरू होते ही मुख्यमंत्री ने किसानों से 5-5 किलो अनाज और विद्यार्थियों से पांच 5-5 रुपये मांगने शुरू कर दिए। कर्मचारियों की सैलेरी काटी गई, उनके भत्ते ख़त्म कर दिए गए। आज भी बहुत सारे कर्मचारियों को वक्त पर सैलेरी नहीं मिल रही है। राज्यसभा सांसद ने पूछा कि क्या महज एक से दो हफ्ते में ही हरियाणा सरकार के 1 लाख 42 हज़ार करोड रुपए खत्म हो गए? क्यों सरकार को कर्ज़ लेकर कर्मचारियों की सैलेरी देनी पड़ रही है। लोगों से लिया गया करोड़ों का दान, कर्मचारियों के काटे गए भत्ते व सैलेरी, बजट और कर्ज़ का रुपया कहां ख़र्च किया? क्योंकि बीजेपी सरकार में कांग्रेस सरकार के मुक़ाबले 3 गुणा कर्ज़ बढ़ गया है। बावजूद इसके किसी भी वर्ग को कोई राहत नहीं दी गई। कोरोना से पहले भी प्रदेश में कोई बड़ी परियोजना, बड़ा उद्योग या बड़ा संस्थान स्थापित नहीं हुआ। इसके विपरित पहले से प्रस्तावित या स्थापित इकाईयां भी हरियाणा से विस्थापित हो गई। दीपेंद्र ने कहा कि उनके द्वारा कांग्रेस सरकार में मंज़ूर करवाई गई रेल कोच फैक्टरी, महम और करनाल एयरपोर्ट, रोहतक तक मेट्रो, रैपिड ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए इस सरकार ने कोई क़दम नहीं उठाया। केंद्र से मज़ूर 1 लाख 57 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट अबतक पूरे नहीं हुए हैं। 56 हज़ार करोड़ के प्रोजेक्ट तो बीजेपी सरकार ने कैंसिल कर दिए हैं।

 

हरियाणा में बेरोज़ागारी दर 43 प्रतिशत तक का आंकड़ा छू चुकी है। CMIE ने अप्रैल के जो आंकड़े जारी किए उसने उसके मुताबिक हरियाणा में रोज़गार चाहने वाला लगभग हर दूसरा आदमी बेरोज़गार है। आज भी प्रदेश में 35.7 बेरोज़गारी की दर है। बड़े राज्यों में बिहार के बाद ये सबसे ज्यादा दर है। देश की औसत से हरियाणा में दोगुनी बेरोज़गारी है। ऐसा नहीं है कि ये आंकड़े सिर्फ कोरोना काल में ही बढ़े हैं। कोरोना से पहले भी हरियाणा में 28 प्रतिशत बेरोज़गारी दर थी। हुड्डा सरकार में ये दर महज़ 2.8 प्रतिशत होती थी। बावजूद इसके प्रदेश सरकार नई नौकरियां देने की बजाए, युवाओं को बेरोज़गार करने पर तुली है। रोज़ अलग-अलग महकमों से कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि 1983 PTI के मुद्दे को सरकार राजनीतिक रंग देना चाहती है। इसलिए वो कर्मचारियों को संरक्षण नहीं दे रही। इनकी नौकरी बचाने के लिए सरकार को अपनी विधायी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। जिस तरह हुड्डा सरकार में गेस्ट टीचर्स को संरक्षण दिया गया, INLD के कार्यकाल में टर्मिनेट किए गए 4000 MITC को नौकरी दी गई, INLD भर्ती घोटाले के 3200 JBT टीचर्स को नौकरी पर रखा गया, इसी तरह से बीजेपी सरकार को भी PTI को संरक्षण देना चाहिए। साल 2015, 16 और 17 से लटकी पड़ी 1538 पदों की भर्तियों की भी अंतिम सूची जारी करके जल्दी ज्वाइनिंग देनी चाहिए। पीजीटी संस्कृत को ज्वाइनिंग देने में भी कोई देरी नहीं होनी चाहिए। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) रिजर्वेशन में 5 साल का एज रिलेक्सेशन दिया जाना चाहिए।

 

किसानों की समस्याओं का ज़िक्र करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि पहले तो सरकार ने गेहूं और सरसों की खरीद ढंग से नहीं की गई। फिर पेमेंट के लिए लंबा इंतज़ार करवाया। आज भी गेहूं की 1700 करोड़ की पेमेंट बाकी है। यही हाल अब मक्का किसानों का हो रहा है। शाहबाद, लाडवा, बबैन, इस्माईलाबाद या आसपास की मंडियों में मक्का लिए बैठे हैं। लेकिन सरकार उनकी ख़रीद नहीं कर रही है। जबकि ख़ुद सरकार किसानों को सलाह दे रही है कि वो धान की बजाए मक्का उगाएं। जिस मक्का का MSP 1760 रुपये है, उसके किसानों को सिर्फ 670 रुपये दिए जा रहे हैं। ज्यादातर किसानों को महज़ 1100 से 1200 रुपये में मक्का बेचनी पड़ रही है।

 

सरकार ने एमएसपी के नाम पर किसानों के साथ मजाक किया है। जो बीजेपी 2022 तक किसानों की आय डबल करने का वादा करती थी, उसने खरीफ की फसलों के रेट में 2 से 5 फ़ीसदी तक की ही बढ़ोतरी की है। उदाहरण के तौर पर धान के रेट को 1815 रुपए से बढ़ाकर महज़ 1868 रुपये किया गया है। ये 3 फ़ीसदी से भी कम की बढ़ोतरी है। इस हिसाब से देखा जाए तो किसानों की आय डबल करने के लिए बीजेपी को अगले सीजन में धान का रेट करीब 1600 रुपए और बढ़ाना पड़ेगा। क्या सरकार ऐसा करेगी?

 

 

इस मौक़े पर सांसद दीपेंद्र सब्ज़ी उत्पादक किसानों से भी मिले। उन्होंने कहा कि भावांतर भरपाई योजना से किसानों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। मॉड रेट की नीति की वजह से किसानों को उनके उत्पादन की लागत तक नहीं मिल पा रही है।

सरकार किसानों को फसल के उचित रेट देने की बजाए उनपर महंगाई की मार मारने में लगी है। लगातार दसवें दिन भी पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी की गई है। दस दिन में पेट्रोल का दाम 5.47 रुपये और डीजल का दाम 5.80 रुपये प्रति लीटर बढ़ा है। आज क्रूड ऑयल 35-40 डालर प्रति बैरल है, जो कांग्रेस सरकार में 107 डॉलर था। बावजूद इसके आम जनता को तेल के दामों में कोई राहत नहीं दी गई। हरियाणा में पेट्रोल पर 27.25 प्रतिशत वैट और डीजल पर 17.22 प्रतिशत वैट लगाया हुआ जो हुड्डा सरकार के कार्यकाल में महज़ 9.24 था।
किसान, नौजवान, आम आदमी के साथ विद्यार्थियों की भी सरकार अनदेखी कर रही है। NSUI की मांग के दबाव में प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट्स को अगली क्लास में प्रमोट करने का फैसला तो ले लिया है लेकिन अभी भी फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को प्रमोट नहीं करने पर अड़ी हुई है। संक्रमण के इस काल में सरकार हरियाणा के विद्यार्थियों से परीक्षा लेना चाहती है, जबकि दूसरे प्रदेशों के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा प्रमोट कर रही है। दीपेंद्र ने कहा कि सरकार को ऐसे दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए। अगर कई राज्य और यूनिवर्सिटी सभी बिना परीक्षा स्टूडेंट्स को प्रमोट कर रही है तो हरियाणा सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही? मध्यप्रदेश और पुडुचेरी ने भी आज और कल में ऐसा फ़ैसला लिया। हरियाणा सरकार बेवजह इसे टाल रही है।

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