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हरियाणा सरकार के गेहूं खरीद को 30 जून तक बढ़ाने को कांग्रेस ने किसानो के साथ धोखा बताया

चंडीगढ़,27मार्च। अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार द्वारा गेहूं कि खरीद 30जून तक बढ़ाने के फैसले को किसानो के साथ धोखा करार दिया है।

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सुरजेवाला ने यहां कहा कि किसानों को 2022 तक दोगुनी आय करने का झुनझुना दिखाकर भाजपा ने केंद्र व हरियाणा में सत्ता हथिया ली परंतु भाजपा-जजपा सरकार गेहूँ खरीद को तीन हिस्सों में 30 जून तक टालकर किसान के साथ घिनौना षडयंत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि 26 मार्च, को जारी किया गया भाजपा-जजपा सरकार का तुगलकी फरमान अपनेआप में किसान-खेत मजदूर के साथ एक भद्दा एवं क्रूर मजाक है, जिसके तहत गेहूँ खरीद को टालकर 30 जून, तक ले जाया गया है । ऊपर से जले पर नमक छिड़कने का आलम यह है कि मुख्यमंत्री, मनोहर लाल खट्टर कह रहे हैं कि किसान अपनी गेहँू की फसल काटकर घर रख ले । उधर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को शराबियों की सेहत की चिंता से फुर्सत नहीं मिल रही। वो किसान व खेत मज़दूर के बारे में सोच नहीं पा रहे। किसान की पीठ में भाजपा-जजपा सरकार द्वारा खंजर घोंपने वाले ‘तुगलकी फरमान’ के पहलू चौंकानेवाले हैं। इसके अनुसार गेहूँ की फसल की खरीद 20 अप्रैल से पहले शुरू नहीं होगी। गेहूँ की फसल की खरीद 3 अलग अलग समय पर होगी, यानि 20 अप्रैल से 5 मई, 6 मई, से 31 मई, व 1 जून, से 30 जून तक। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल, से 5 मई, तक किसान को एमएसपी के अलावा एक नई फूटी कौड़ी नहीं दी जाएगी।

 

उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान गेहूँ की फसल 1 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच अनाज मंडी में बेच देता है। यही पिछले सालों का तजुर्बा रहा है। ऐसे में किसान 30 जून तक फसल कैसे नहीं काटे या अनाज मंडी में न बेचे?.​क्या खट्टर जी ओर दुष्यंत चौटाला जी यह नहीं समझते कि अगर किसान फसल की कटाई नहीं करेगा, तो खड़ी फसल नष्ट हो जाएगी? क्या भाजपा – जजपा सरकार को यह ज्ञान नहीं कि किसान 3 महीने तक यानि 30 जून तक फसल का घर में भंडारण नहीं कर सकता, क्योंकि 95 प्रतिशत किसान 5 एकड़ से कम जमीन का मालिक है और उसे मौजूदा फसल का कर्ज भी चुकाना है तथा अगली फसल की बिजाई का इंतजाम करना है।.​क्या खट्टर सरकार यह नहीं समझती कि अगर किसान 30 जून तक कटाई नहीं करेगा, तो फिर खरीफ फसल की बिजाई कैसे होगी?.​क्या कारण है कि खट्टर सरकार ने आज तक गेहूँ-सरसों खरीद के लिए न तो बारदाना यानि कट्टे खरीदे, न खरीद के लिए अनाजमंडी आवंटित की, न खाद्य निगम हैफेड, एचडब्लूसी या फूड एवं सिविल सप्लाईज़ डिपार्टमेंट की मीटिंग ली, न मंडीवाईज़ मूवमेंट प्लान निर्धारित की, न मंडी में खरीद स्टाफ की ड्यूटियां लगाईं, न मंडी लेवल कमेटियां बनाईं? तो फिर गेहूँ या सरसों की खरीद होगी कैसे?

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उन्होंने पूछा क्या कारण है कि 3 बार हुई बेमौसमी बारिश व ओलों से नष्ट हुई किसान की फसल के मुआवज़े की आज तक एक फूटी कौड़ी नहीं दी गई?

 

क्या कारण है कि केंद्र सरकार ने आज तक खरीद बारे खाद्य निगम की जिम्मेदारी नहीं निर्धारित की?.​क्या केंद्र की मोदी सरकार यह भूल गई है कि देश की खाद्य सुरक्षा हरियाणा व पंजाब पर निर्भर है? क्या वो यह नहीं जानते कि खाद्यान्न के केंद्रीय कोटे में हरियाणा व पंजाब का (खास तौर पर गेहूँ की फसल) का 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है? क्या यह सही नहीं कि 2019-20 रबी सीज़न में देश में 341.33 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न की खरीद हुई, जिसमें से 222.30 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न अकेले पंजाब व हरियाणा ने दिया।

 

उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब यह है कि यह ‘फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ पर तालाबंदी की है। भाजपा सरकार ने पाँच साल में खाद्य निगम को खाद्यान्न सब्सिडी का पैसा देना ही लगभग बंद कर दिया। तीन चौंकाने वाले तथ्य ये हैं कि भाजपा सरकार पर खाद्य निगम को 1,74,000 करोड़ रु. आज भी देय है। पाँच सालों में निगम का कर्जा 2,65,000 करोड़ रु. हो गया है। इसमें से अधिकतर कर्ज 8 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज पर लिया गया है। ऐसे में निगम पर ताला लग जाएगा, तो फसल की खरीद कौन करेगा।

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