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Dharm/Festivals

प्रशासनिक अव्यवस्था के बीच में मना टोहाना में छठ पर्व का त्यौहार

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टोहाना (नवल सिंह) । हर साल दीवाली के छठे दिन यानी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता है। छठी मइया की पूजा की शुरुआत चतुर्थी को नहाए-खाय से होती है। इस साल षष्ठी यानी 20 नवंबर को शाम और सप्तमी यानी 21 नवंबर की सुबह को सूर्य …

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परंपरा : झज्जर में एक परिवार ने बनाया 15 फुट लंबा विशाल गोवर्धन

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झज्जर (सुमित कुमार) । झज्जर में एक परिवार अपनी 100 साल पुरानी परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए। इस परिवार मे विश्वकर्मा दिवस पर गोवर्धन के दिन हर बार विशालकाय गोवर्धन बनाने की परंपरा है। इसी परंपरा को जिंदा रखने के लिए हर बार गौशाला से गाय का गोबर …

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धनतेरस पर्व 13 नवंबर को,धनतेरस पर खाली बर्तन ना लाएं घर,माना जाता है अशुभ

Dhanteras

चंडीगढ़: धनतेरस पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है।धनतेरस होने से स्वास्थ्य के देवता भगवान धनवंतरी की पूजा भी करने का विधान है। धनतेरस 12 व 13 नवम्बर की रात्री को 9:30 बजे त्र्योदशी प्रारम्भ हो जाएगी, जोकि शाम को 13 नवम्बर 2020 को शाम को 6 बजे तक त्रयोदशी रहेगी। इस लिए धनतेरस …

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गाय के गोबर से बन रहे गौरी-गणेश की मूर्तियां,पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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चंडीगढ़। इस बार चाइनीज मुक्त सामान के साथ दिवाली मनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। गाय के गोबर से बने दीयो की अद्भुद छटा से दिवाली रंगीन होगी, जिसके लिए चंडीगढ़ सेक्टर 45 की गौशाला  में गाय के गोबर से मूर्तियां और दीये तैयार किए जा रहे हैं।  गाय …

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संतान की मंगलकामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत 8 नवम्बर 2020 दिन रविवार को

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अहोई, अनहोनी शब्द का अपभ्रंश है। अनहोनी को टालने वाली माता देवी पार्वती हैं। इसलिए इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना का भी विधान है। अपनी संतानों की दीर्घायु और अनहोनी से रक्षा के लिए महिलाएं ये व्रत रखकर साही माता एवं भगवती पार्वती से आशीष मांगती हैं। अहोई अष्टमी …

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4 नवंबर , बुधवार को मनाएं करवा चौथ

कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चौथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाओं   और कुंवारी  कन्याओं  के लिए गौरी पूजन का भी विशेश महात्म्य है।आधंुनिक युग में चांद से जुड़ा यह पौराणिक  पर्व  महिला दिवस से कम नहीं है जिसे पति व मंगेतर अपनी अपनी आस्थानुसार मनाते हैं।      विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। विवाहित महिलाएँ भगवान शिव माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ.साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है। करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण जो कि अर्घ कहलाता है किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है।   4 नवंबर ] बुधवार करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:29 से 18:48 चंद्रोदय- 20:16 च्ंाद्रोदय का समय- रात्रि 8 बजकर 15  मिनट पंचांगानुसार परंतु वास्तव में कई नगरों में यह पौने 9 से 9 बजे केे मध्य दिखेगा।  चतुर्थी तिथि आरंभ- 03:24 (4 नवंबर) चतुर्थी तिथि समाप्त- 05:14 (5 नवंबर) क्या है सरगी का वैज्ञानिक आधार ? व्रत रखने वाली महिलाओं को उनकी सास सूर्योदय से पूर्व सरगी ‘ सदा सुहागन रहो ’ के आशीर्वाद सहित खाने के लिए देती हैं जिसमें फल, मिठाई, मेवे, मटिठ्यां  ,सेवियां, आलू से बनी कोई सामग्री, पूरी आदि होती है। यह खाद्य सामग्री शरीर को पूरा दिन निर्जल रहने और शारीरिक आवश्यकता को पर्याप्त उर्जा प्रदान करने में सक्षम होती है। फल में छिपा विटामिन युक्त तरल दिन में प्यास से बचाता है। फीकी मटठ्ी उर्जा प्रदान करती है और रक्त्चाप बढ़ने नहीं देती। मेवे आने वाली सर्दी को सहने के लिए शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं। मिठाई सास बहू के संबंधों में मधुरता लाने  का जहां प्रतीक है ,वहीं यह व्रत के कारण शुगर का स्तर घटने नहीं देती जिससे शरीर पूरी क्षमता से कार्य करता है और व्रत बिना जल पिए सफल हो जाता है।यह व्रत शारीरिक व मानसिक परीक्षा है ताकि वैवाहिक जीवन में विशम व विपरीत परिस्थितियों में एक अर्धांगनी , पति का साथ निभा सके। भूखे प्यासे और शांत रहने की कला सीखने का यह भारतीय सभ्यता व संस्कृति में  पर्वोंं के माध्यम से अनूठा प्रशिक्षण है। चंद्र सौंदर्य एवं मन का कारक ग्रह है अतः चंद्रोदय पर व्रत खोलने से मन में शीतलता का  संचार होता है और सोलह श्रृंगार किए पत्नी देख कर  कुरुपता में भी सौंदर्य बोध होता है।  करवा चौथ की पूजन सामग्री     करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें. पूजन …

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महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों का सामना करने हेतु स्वरक्षा प्रशिक्षण एवं धर्माचरण अत्यंत आवश्यक !- हिंदू जनजागृति समिति

_पूर्वोत्तर भारत के महिलाओं के लिए ऑनलाईन शौर्य जागरण कार्यक्रम संपन्न !_ महिलाओं पर बढते अत्याचारों का सामना करने हेतु स्वरक्षा प्रशिक्षण एवं धर्माचरण अत्यंत आवश्यक ! – हिन्दू जनजागृति समिति बिहार – पूरे देश में महिलाओं पर होनेवाले बलात्कार, लव जिहाद की घटनाओं की बढती संख्या को देखकर महिलाओं …

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ईश्वर एक विश्वास

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ईश्वर विश्वास पर ही मानव प्रगति का इतिहास टिका हुआ है। जब यह डगमगा जाता है तो व्यक्ति इधर- उधर हाथ पाँव फेंकता विक्षुब्ध मनः स्थिति को प्राप्त होता दिखाई देता है। ईश्वर चेतना की वह शक्ति है जो ब्रह्माण्ड के भीतर और बाहर जो कुछ है, उस सब में …

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