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राजोआना की फांसी को आजीवन कारावास में न बदलने के अमित शाह के बयान को अकाली दल ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया

चंडीगढ,3दिसम्बर। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए बलवन्त सिंह राजोआना की इस मामले में फांसी की सजा को आजीवन कारावास में न बदले जाने के केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान को शिरोमणि अकाली दल ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखवीर बादल ने मंगलवार को यहां कहा कि इस मामले में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व शाह से मिलेगा।

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यहां पंजाब की कानून-व्यवस्था और वित्तीय हालात पर काबू करने की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद सुखवीर बादल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह बात दुर्भाग्यपूर्ण है कि गुरूनानक देव की 550 वीं जयन्ती पर राजोआना की फांसी को आजीवन कारावास में बदले जाने के केन्द्र सरकार के कदम के समाचार आने के बाद अब कहा जा रहा है कि ऐसा किया ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि राजोआना के साथ यह बेइंसाफी है। उन्होंने तीस साल बगैर पेरोल कारावास पूरा किया है। पुलिस कर्मियों ने ड्यूटी पर रहते हत्या की है उन्हें कोई सजा नहीं दी गई।

 

पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी पर सुखवीर ने कहा कि यह उनका आंतरिक मामला है। लेकिन खनन और जमीनों पर कब्जे के मामले में मनमानी की जा रही है। मुख्यमंत्री का तो पता ही नहीं रहता कि वे बीस-बीस दिन कहां रहते है। राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख है। उन्हें ज्ञापन सौंपकर हालत काबू में करने की मांग की गई है।

 

 

उधर अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के सवाल के जवाब में कहा कि राजोआना की फांसी की सजा आजीवन कारावास में नहीं बदली गई है। बिट्टू ने पूछा था कि राजोआना की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में क्यों बदला गया? इस पर अमित शाह ने कहा कि कृपया मीडिया रिपोर्ट पर न जाएं। कोई माफी नहीं दी गई। पिछले माह मीडिया में रिपोर्ट आई थीं कि राजोआना की फांसी की सजा केन्द्रीय गृृह मंत्रालय ने आजीवन कारावास में बदल दी है।

 

 

करीब 52 वर्षीय राजोआना अभी पटियाला जेल में बन्द है। चंडीगढ स्थित सीबीआई अदालत ने 1 अगस्त 2007 को इसे पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाई थी और 31 मार्च 2012 को फांसी दी जाना थी। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में राजोआना मुख्य अपराधी करार दिया गया था। शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी की दया याचिका पर केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने 28 मार्च 2012 को राजोआना की फांसी पर रोक लगा दी थी।

 

केन्द्रीय गृृह मंत्रालय ने गुरू नानक देव की 550 वीं जयंती के उपलक्ष्य में राजोआना के अलावा देश की जेलों में बंद आठ अन्य सिख कैदियों को दण्ड मुक्त किया था। चंडीगढ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय में 31 अगस्त 1995 को किए गए विस्फोट में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअन्त सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। पंजाब पुलिस के कर्मचारी दिलावर सिंह ने आत्मधाती बम का काम किया था। दिलावर के नाकाम रहने पर राजोआना को आत्मघाती बम की भूमिका निभानी थी। राजोआना ने बेअंत सिंह हत्या के पीछे वर्ष 1984 के सिख संहार को कारण बताया था।

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