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शामलात की जमीनें बचाने के लिए राज्यपाल को मिला ‘आप’ का प्रतिनिधिमंडल

चंडीगड़, 17 दिसंबर 2019  :  आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर को 2 मांग पत्र दे कर पंचायतों की सांझी जमीनें (शामलात) को औद्योगिक ईकाइओं के लिए लेने संबंधी कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार की तरफ से लिए गए तुगलकी फैसले को रद्द करने की मांग की। जबकि दूसरे मांग पत्र के द्वारा शिक्षा मंत्री विजैइन्दर सिंगला को मंत्री मंडल से बर्खास्त करने की जोरदार मांग रखी।
प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व में राज्यपाल को मिले इस वफद में विधायक प्रिंसिपल बुद्ध राम, विधायक रुपिन्दर कौर रूबी, विधायक जै कृष्ण सिंह रोड़ी, विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर, हरचन्द सिंह बरसट, सुखविन्दर पाल सिंह (सुखी), बलजिन्दर सिंह चौंदा, नीना मित्तल, गोविन्दर मित्तल, इकबाल सिंह, प्रभजोत कौर, मनजीत सिंह सिद्धू शामिल थे।
‘आप’ मुताबिक पंजाब मंत्री मंडल ने ‘दा पंजाब विलेज कामन लैंडज’ (रैगूलेशन) रूल्ज 1964 में संशोधन कर शामलात जमीन पंचायतों के नाम से उद्योग विभाग और पंजाब लघु उद्योग व निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के नाम करने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया है। पंजाब में 1 लाख 35 हजार एकड़ के लगभग हर वर्ष बोली पर चढ़ाई जाती अपनी जमीन से पंचायतें वंचित हो जाएंगी। ग्रामीण औद्योगिक विकास के नाम पर लिए जा रहे इस फैसले के निष्कर्ष वास्तव में भयानक साबित होंगे।
‘आप’ के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि फैसले के मुताबिक पंचायतें अपनी जमीन पीएसआईईसी को बेचने के लिए प्रस्ताव डालेंगी और सरकार की मंजूरी के बाद यह जमीनें आगे बेची जाएंगी, परंतु पीएसआईईसी पंचायतों को पूरा पैसा नहीं देगी। सरकार की नीयत और नीति पर यह नुक्ता गंभीर सवाल खड़ा करता है, कि क्या सरकार सचमुच ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सहृदय है या फिर वित्तीय एमरजैंसी में जाने के कारण पंचायती जमीनों की बेच कर कुछ समय अपना ओर वित्तीय जरूरत पूरा करना (टाईम पास) चाहती है? क्योंकि पीएसआईईसी सिर्फ 25 प्रतिश्त राशि पंचायतों को अदा करके जमीन की 100 प्रतिश्त मालकियत अपने नाम करवा लेगी, बाकी की रकम 4 बराबर की किश्तों के साथ बाद में देगी। सैद्धांतिक फैसले के मुताबिक किश्तें जमीन की खरीद से 2 साल के बाद शुरू होंगी। खत्म कब होंगी? कोई हवाला नहीं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वास्तव में यह पंजाब के लोगों और गांवों के साथ किया जा रहा एक बड़ा फर्जीवाड़ा है। जिस का सबसे अधिक क्षतिपूर्ति भूमि रहित किसान खास करके दलित वर्ग को उठाना पड़ेगा, जिनके लिए विलेज कमान लैंडज एक्ट 1961 के अनुसार एक तिहाई (वन थर्ड) जमीन आरक्षित है। यह भूमि रहित दलित और किसान जो अब शामलात की इस जमीन को सस्ते ठेके पर लेकर अपने खाने लायक दाने और जानवर-पशूओं के लिए हरा-चारा के प्रबंध करते थे, उनका क्या बनेगा? यहां तक कि बेघर गरीबों, दलितों को जो पांच मरलेे का प्लाट इन पंचायती जमीनों में से काटे जाने की उम्मीद थी, (कई गांवों में ग्राम सभाओं के द्वारा यह प्लाट मिले भी हैं) उस प्लाट देने वाली योजना पर भी पक्के तौर पर पानी फिर गया है।
चीमा ने सवाल किया कि यह कैसी सरकार है जो गांवों की सदियों पुरानी सांझी विरासत की केवल 25 प्रतिशत पैसों के साथ रजिस्ट्री अपने नाम करवाकर हड़प्पना चाहती है। चीमा ने पीएसआईईसी पहले ही 1500 करोड़ रुपए के प्लाट घोटाले के आरोपों में घिरी हुई है। जो घोटाले बाज अफसर विजीलैंस ब्यूरो की जांच में आरोपी पाए गए, वह मुख्य मंत्री दफ्तर की छत्र-छाया में आज भी उन अहम पदों पर डटे हुए हैं, जिनके द्वारा पंचायती जमीन को औद्योगिक प्रोजेक्टों को बेचने के मंसूबे बनाए जा रहे हैं। यदि पंचायतों के पास जमीन ही न बची तो मनरेगा और विकास योजनाएं तो खत्म हो जाएंगी और पंचायत विभाग का स्टाफ भी वेतन को तरसेगा, क्योंकि पंजाब के वित्तीय हालत बेहद नाजुक हैं। चाहिए तो यह था कि कैप्टन सरकार इस वित्तीय एमरजैंसी पर जीत हासिल करने के लिए पिछली बादल सरकार की तरफ से पाले गए रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, शराब माफिया, जमीन माफिया, लकड़ी माफिया, शिक्षा माफिया, मंडी माफिया, बदली माफिया, केबल माफिया और बिजली माफिया आदि पर नकेल कस कर इस अरबों-खरबों की लूट को रोकती और सही और पारदर्शी तरीके से पंजाब का खजाना भरती। एक इमानदार और जन हितैषी सरकार के लिए यह बेहद आसान है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार इस की शानदार मिसाल है, परंतु लोगों की उम्मीदों को कुचलते कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने बादलों के माफिया राज की कमान अपने हाथ में ले ली और बादलों की लूट को भी मात दे दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि कैप्टन सरकार की तरफ से पंचायती जमीनें लूटने के लिए की गई कानून्नन काली संशोधन तुरंत रद्द की जाए। यह भी मांग रखी कि गांवों की सांझी शामलाटी सम्पतियों सम्बन्धित कोई भी फैसला जा प्रस्ताव ग्राम पंचायत नहीं बल्कि ग्राम सभा की बाकायदा बैठक बुला कर ली जाए।
‘आप’ के प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि पंजाब की आर्थिक मंदहाली से निपटने के लिए सबसे पहले सरकार को वाइट पेपर जनतक करने के निर्देश दिए जाएं जिससे इसके लिए जिम्मेदार गुटों का सच लोगों के सामने आ सके। इस उपरांत राज्य में सख्ती के साथ माफिया राज खत्म किया जाए, जरूरत पड़े तो सरकार ही भंग कर दी जाए।

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