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पंजाब हिमाचल सीमा के पास धड़ल्ले से चल रहा अवैध ईंटो की बिक्री का काम

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इंदौरा, 13 फरवरी(गगन ललगोत्रा): पंजाब हिमाचल सीमा के पास कंडवाल में अवैध रूप से ईंटों की बिक्री का धंधा धड़ल्ले से खूब फल फूल रहा है। यहां सरेआम पंजाब के लोग ईंटों की डंपिंग कर रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर हिमाचल प्रदेश में सप्लाई की जा रही है। वहीं इस प्रकार अवैध रूप से ईंटों की सप्लाई करने से हिमाचल के ईंट भट्ठा उद्योग को भारी आर्थिक चूना लग रहा है।

हैरानी की बात यह है कि यह सब विभाग की नाक तले हो रहा है और संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। वहीं विभागीय अधिकारी इसे जीएसटी बता अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं।

जानकारी के अनुसार पंजाब के कई लोग पंजाब से ईंटों को लाकर कंडवाल व इसके आसपास, लोध्वां मार्ग आदि पर डंपिंग कर रहे हैं और हिमाचल भट्ठा उद्योग के पेट पर लात मार रहे हैं। यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बाहरी राज्यों का कोई भी व्यक्ति ईंटों की डंपिंग कर उसकी बिक्री नहीं कर सकता। यही नहीं बल्कि भट्ठा उद्योग मालिक के अतिरिक्त हिमाचल का भी कोई अन्य व्यक्ति ईंटों की डंपिंग कर उनकी बिक्री नहीं कर सकता। हिमाचल प्रदेश ईंट (नियंत्रण) अधिनियम धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए 14 अक्तूबर 1970 में अधिसूचित सूचित एवम् 31 अक्तूबर 1970 में हिमाचल प्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हिमाचल प्रदेश ब्रिक्स ( कन्ट्रोल ) के संशोधित आदेश के तहत प्रदेश में उक्त कारोबार को अवैध घोषित कर दिया गया था। उक्त अध्यादेश के मुताबिक ईंट भट्टा का लाईसेंस धारक ही प्रदेश में डंपिंग कर बिक्री कर सकता है।

ज्ञात रहे कि इस सम्बंध में पूर्व वर्ष जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रण अधिकारी राजीव शर्मा द्वारा कंडवाल स्थित व इसके आसपास ईंटों की डंपिंग करने वालों को नोटिस भिजवाए गए थे, जिसमें इन्हें 15 दिन तक डंपिंग साइट्स से ईंटें उठाने व साइट्स को खाली करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसा नहीं करने पर सभी साईटस का औचक निरीक्षण करके गलत पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कारवाई अमल में लाने के निर्देश जारी किए गए थे। मगर कुछ समय पश्चात से यह सिलसिला न कि पहले की भांति चलने लगा बल्कि और भी बढ़ फूल गया है। अब कई विभिन्न स्थानों लर बिक्री के लिए ईंटों के अम्बर लगे सरेआम दिखाई देते हैं।

ईंटों से भर कर हिमाचल को लेकर जाते जब ट्रकों से बिल मांगा गया तो उनके पास जो बिल थे वह पुराने ही बिल तारीख बदल कर रखे थे। मगर हैरत की बात यह थी कि कंडवाल स्थित टेक्स टोल अधिकारियों य वहां उपस्थित कर्मचारियों ने इन तरीझ बदले हुए बिल्लों पर एतराज तक नहीं जताया बल्कि पर्ची काट कर उन्हें आगे भेजने दिया गया।

इस सम्बंध में असिस्टेंट टैक्स कमिश्नर नूरपुर उजागर सिंह राणा का कहना है कि उक्त मामला उनके ध्यान में है। यह सिविल कार्य में आता है और इनमें से अधिकतर जीएसटी अदा कर रहे हैं और इनमें से अधिकतर द्वारा रजिस्ट्रेशन कराई हुई है। अन्यथा अप्लाई की हुई है। इसके बावजूद समय समय पर निरीक्षण किया जाता है। ओवरलोड होने पर जुर्माने किये जा रहे हैं। हाल ही में ओवरलोड ट्रालियों में होने पर जुर्माने किये गए हैं।