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ओपी चौटाला नहीं अब दुष्यंत को पार्टी पर ही भरोसा

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वैसे दावा यह भी है कि निलंबन और निष्कासन के आदेश पर चौटाला साहब के दस्तखत नहीं,वे न्याय का साथ देंगे

चंडीगढ,10नवम्बर। हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला को अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अपने दादा ओपी चौटाला पर नहीं बल्कि पार्टी पर ही भरोसा है। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या उनकी मौजूदा लडाई में ओपी चौटाला दखल कर सुलह करवा सकते है तो दुष्यंत ने उलटकर सवाल किया कि कौन सी लडाई? अब पार्टी ही कोई फैसला करेगी। साथ ही दुष्यंत ने यह भी कहा कि जब न्याय और अन्याय की बात आयेगी तो ओपी चौटाला न्याय के साथ खडे होंगे। जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी चौटाला का पत्र नहीं मिलता तो मैं पार्टी से अपना निष्कासन नहीं मानूगा।

वैसे दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि इंडियन नेशनल लोकदल से उनके निलंबन और निष्कासन के आदेश पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी चौटाला के दस्तखत नहीं थे। पार्टी से अपने निष्कासन की जानकारी भी उन्हें मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि निष्कासन का आदेश भी बंद कमरे में तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि ओपी चौटाला के नाम कार्यालय सचिव ने नोटिस दिया जिसे स्वीकार किया गया। जब दोषारोपण के तथ्य पूछे गए तो जवाब नहीं मिला। अनुशासन समिति के अध्यक्ष शेर सिंह बडशामी से तथ्य पूछे गए तो नहीं बताए गए। मीडिया से पता चला कि मुझे और दिग्विजय सिंह चौटाला को पार्टी से निकाल दिया गया है।

दुष्यंत ने कहा कि उन्हें लगातार संगठन की गतिविधियों से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा था। मंचों पर व बैठकों में अपमानित किया जा रहा था। पार्टी से पिछली चार पीढी से जुडे कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के भुगतान पाए लोग बताया जा रहा था। हमारी गतिविधियों को पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाता था। अजय सिंह चौटाला के पेरोल पर बाहर आने के 48 घंटे पहले उन्हें पार्टी से निकाला गया। पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। संगठन को तोडने का प्रयास किया जा रहा है। दुष्यंत ने कहा कि ओपी चौटाला ने उनका निलंबन या निष्कासन नहीं किया। उनके हस्ताक्षरों का ऐसा कोई पत्र उन्हें नहीं मिला। अनुशासन समिति की रिपोर्ट बन्द कमरे में तैयार कर उनके हस्ताक्षर करवाए गए। परोक्ष में पार्टी के नेता और नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला पर प्रहार करते हुए दुष्यंत ने कहा कि विधानसभा में भाजपा की भाषा बोली जाती है। उन्होंने कहा कि आगामी 17नवम्बर को जींद में पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सेक्रेटरी जनरल चौधरी अजय सिंह चौटाला आगे की रणनीति पर फैसला करेंगे। उन्हें सर्वसम्मति से फैसले का अधिकार सौपा गया है। उन्होने कहा कि अब जींद से न्याय युद्ध शुरू होगा।

इंडियन नेशनल स्टूडेंट््स आर्गेनाइजेशन को ओपी चौटाला द्वारा भंग किए जाने के सवाल पर दुष्यंत ने कहा कि इस संगठन के संरक्षक अजय सिंह चौटाला हैं और संगठन के संविधान के अनुसार संरक्षक को ही इसे भंग करने का अधिकार है। दुष्यंत चौटाला के इंडियन नेशनल लोकदल से निष्कासन के बाद जननायक सेवादल को सक्रिय किए जाने के सवाल पर दुष्यंत ने कहा कि यह गैर राजनीतिक संगठन है जो कि वर्ष 2002 में अजय सिंह चौटाला ने स्थापित किया था। वर्ष 2013 में अजय सिंह को सजा होने के बाद यह निष्क्रिय हो गया था। उन्होंने कहा कि ओपी चौटाला परिवार के मुखिया है और उनका कद बढाना है। चौधरी देवीलाल की विचारधारा को आगे बढाना है। पार्टी से निष्कासन कर मुझे नहीं रोका जा सकता है।