Home HIMACHAL श्रीराम ने तोडा शिव धनुष ,सीता जी ने पहनाई वरमाला

श्रीराम ने तोडा शिव धनुष ,सीता जी ने पहनाई वरमाला

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इन्दौरा/कांगड़ा( गगन ललगोत्रा) : उपमंडल मुकेरिया के गाँव बुड़ाबढ़ में न्यू देश सेबा दशहरा क्लब द्वारा मनाए जा रहे 10 दिवसीय दशहरा महोत्सव में सीता स्वय्म्बर का मंचन किया गया जिसमे आवेशावतार भगवान् परशुराम व लक्ष्मण संवाद चला। कार्यक्रम को देख मौजूद लोगों ने प्रभु श्रीराम के जयकारे भी लगाए।

सीता स्वयंबर में जब सैकड़ों प्रतापी राजा राजा जनक की प्रतिज्ञा की शिव धनुष को तोड़ने वाले के साथ ही सीता जी का विवाह होगा और उस धनुष को तोड़ने में असमर्थ रहे। तब श्री राम ने शिव धनुष को तोड़ा तो धनुष को टूटा देखकर भागवान परशुराम प्रकट हुए और चिल्ला कर बोले सुनो, जिसने शिवजी के धनुष को तोड़ा है, वह मेरा शत्रु है, वह सामने आ जाए, नहीं तो सभी राजा मारे जाएंगे।

 

मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराए और बोले परशुराम जी बचपन में हमने बहुत से धनुष तोड़ डाले तब तो आपने ऐसा क्रोध कभी नहीं किया। इसी धनुष के टूटने पर आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हैं? परशुराम ने कहा कि हे बालक, सारे संसार में विख्यात शिवजी का यह धनुष क्या कोई छोटा मोटा धनुष समझा है। लक्ष्मण जी ने हंस कर कहा कि हे देव हमारे समझ में तो सभी धनुष एक से ही हैं। फिर यह तो छूते ही टूट गया। इसमें रघुनाथ जी का भी कोई दोष नहीं है। मुनि! आप तो बिना ही बात क्रोध कर रहे हैं। परशुराम जी अपने फरसे की ओर देखकर बोले अरे दुष्ट! तू मुझे नहीं जानता, मैं तुझे बालक जानकर नहीं मार रहा हूं। क्या तू मुझे निरा मुनि ही समझता है तूने मेरा गुस्सा नहीं देखा है। इस तरह लक्ष्मण व मुनि परशुराम के बीच शब्दों के बाण चलते रहे।

 

 

अंत मे परशुराम की बुद्धि के परदे खुल गए। वो समझ गए कि इस शिव धनुष को तोड़ने वाला कोई साधारण पुरुष नहीं हो सकता तब उनकी समझ में आया कि यह तो साक्षात प्रभु राम हैं परशुरामजी बोले – प्रभु, क्षमा करना, मुझसे भूल हो गई, मैंने अनजाने में आपको बहुत से अनुचित वचन कहे। मुझे क्षमा कीजिए। मंचन को देख मौजूद लोगों ने प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाए।