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जन-भागीदारी व पंचायत ने की स्कूल की काया कल्प

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सांपला(महेश कौशिक): जनभागीदारी व पंचायत के सहयोग से गांव भैसरू कलां का राजकीय प्राथमिक स्कूल निजी स्कूलों को पछाड़ते हुए जिले के अग्रणी स्कूलों में एक हो गया। गांव के स्कूल की कायाकल्प करने के लिए गांव की सरपंच मीना देवी ने जनभागीदारी के साथ साथ निजी कोष व पंचायत फंड के पैसों का सदुपयोग कर यह सिद्व कर दिया है कि गांव का असली विकास गांव के स्कूल से होता है। गांव की सरंपच मीना देवी ने सरकारी स्कूल की तस्वीर ही बदल दी है। स्कूल की दीवारों में ज्ञानवर्धक जानकारियां उकेरी गई है तथा स्कूल के कमरों के अंदर बच्चों को हर विषय की जानकारी के लिए सुदर चित्रकारी करवाई गई है जिसमें लगभग छह से सात लाख रूपये तक की अनुमानित राशी खर्च की जा रही है। गांव की सरंपच मीना देवी ने कहा कि हर कार्य को सरकार के भरोसे नही छोड़ा जा सकता ये जनभागीदारी के कार्य है, जनभागीदारी के माध्यम से पंचायत स्कूल को अपने घर की भांति संवारने का माद्दा रखती हैं। सरंपच मीना देवी ने बताया कि हर कमरे मे पुट्टी करवाई गई और विशेष चित्रकारों के द्वारा विषयों के साथ साथ बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले चित्र बनवाये गए है।

गांव के सरंपच प्रतिनिधि सुशील कौशिक ने बताया कि सरकार ने पढ़ी लिखी पंचायते सिर्फ इसलिए चुनी है कि ताकि प्राथमिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण के लिए जनभागीदारी के माध्यम से सुधारा जा सके। उन्होंनें स्कूल के विकास को लेकर बताया कि स्कूल में पुराना शौचालय था, जो जर्जर अवस्था में पहुंच गया था। इसके लिए नया शौचालय बनवाया गया। उन्होंनें बताया कि स्कूल की दीवारें भी बच्चों को शिक्षा से जोड़ेगी। यहां पर्यावरण , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और विज्ञान से जुड़ी ज्ञानवर्धक शिक्षा दीवारों पर उकेरी जा रही है। चित्रकारी के माध्यम से बच्चे ऐसी शिक्षा पाएंगे। गरीब और अमीर आदमी के बच्चों को एक जैसी शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए हर समुदाय को शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ा जायेगा। दूसरा स्कूल की आवश्यकताओं की पूर्ति करना व प्रभावशाली शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना उनकी पंचायत का लक्ष्य है। आज के दौर में बढ़ते डिजिटल इंडिया के प्रभाव में मेरी कोशिश है कि नित नए डिजिटल तकनीक को स्कूल में प्रयोग कर बच्चो को तकनीकी दुनियां से परिचित कराया जाए। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए कम संसाधन में भी अच्छे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण कर उन्हें गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूल में स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा देने का प्रंबध किया गया है।

स्कूल में कभी नही होती स्टाफ की कमी: सरकारी अध्यापक स्कूल में सरकार के नियमों के तहत आते है लेकिन स्कूल में जब भी किसी अध्यापक की कमी होती है तो स्वयं इस मामले में आगे बढक़र अध्यापकों का प्रबंध करते है जिसके लिए गांव की शिक्षित महिलाएं सहयोग कर रही है।

गांव की सरंपच द्वारा किये गए कार्यो को मिली प्रशासन द्वारा सराहना: खंड़ शिक्षा अधिकारी कृष्णा फौगाट ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की प्रगति को देखकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि गांव की पंचायत सरकार का काम कर रही है। वे अपने स्तर पर स्कूल के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने की कोशिश करेगीं। स्कूल की ओर से स्टाफ सदस्यों ने आगामी सत्र से अग्रेंजी माध्यम की स्वीकृति की बात कही तो उन्होंनें जल्द आला अधिकारियों से इसकी स्वीकृति की बात कही।