Home BREAKING हरियाणा रोडवेज की हडताल , दो दिन रहेगा चक्काजाम

हरियाणा रोडवेज की हडताल , दो दिन रहेगा चक्काजाम

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चंडीगढ़,15अक्टूबर। हरियाणा में एक बार फिर रोडवेज कर्मचारियों ने 16 व 17 अक्टूबर को चक्का जाम करने का फैसला लिया है। हरियाणा कर्मचारी महासंघ का कहना है कि अगर 720 बसों को प्रति किलोमीटर दर से किराये पर लेनेे के फैसले को तुंरत रद्द नहीं किया गया तो 16 व 17 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में चक्का जाम किया जाएगा। रोडवेज की दो दिवसीय हड़ताल से प्रतिदिन लगभग 13.5 लाख यात्री प्रभावित होंगे। परिवहन विभाग को रोजाना लगभग चार करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान भी होगा। इस बीच अखिल भारतीय कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि रोडवेज कर्मचारियों की मांगें तो वाजिब है लेकिन उन्हें पूरे प्रदेश की जनता को परेशानी में डालने के बजाय अपनी हडताल सांकेतिक रखना चाहिए।

सोमवार रात 12 बजे के बाद दस राज्यों में रोडवेज की लगभग 4100 बसों के पहिए थम जाएंगे। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल, जम्मू, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व चंडीगढ़ के मार्गों पर बसें नहीं चलेंगी। हरियाणा में परिवहन व्यवस्था में रोडवेज की बडी भागीदारी है। प्राइवेट बसें लाखों यात्रियों को ढोने में सक्षम नहीं हैं।


उधर हरियाणा सरकार ने रोडवेज कर्मियों की पिछली हडताल को नाकाम करने के लिए एस्मा लागू किया था और राडवेज कर्मचारी नेताओं को गिरफ््तार भी किया था। इस बार भी राज्य सरकार एस्मा के तहत कार्रवाई कर बसें चलाने का पूरा प्रयास करेगी। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए तय है कि पुलिस इस बार भी कर्मचारियों पर लाठियां भांजने से गुरेज नहीं करेगी। ऐसे में कर्मचारियों और पुलिस में झड़प होने के आसार हैं।

इससे पहले हरियाणा कर्मचारी महासंघ से संबद्ध रोडवेज कर्मचारी यूनियन एवं रोडवेज तालमेल कमेटी के वरिष्ठ नेता राजपाल नैन ने राज्य सरकार से कहा था कि वह उनकी मांगों को लेकर बातचीत करे अन्यथा 16 व 17 अक्टूबर को बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार एस्मा के तहत कार्रवाई कर कर्मचारी आंदोलनों को नहीं रोक पाएगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान आपसी बातचीत के माध्यम से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि रोडवेज कर्मी हड़ताल पर नहीं जाना चाहते। सरकार यदि हड़ताल की टालना चाहती है तो वह तालमेल कमेटी के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाएं और मानी गई जायज मांगें लागू करने के आदेश जारी करें।