Home CHANDIGARH हरियाणा सरकार 6 लाख मुकद्दमों से हुई ‘फिक्रमंद’

हरियाणा सरकार 6 लाख मुकद्दमों से हुई ‘फिक्रमंद’

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चंडीगढ़। कोर्ट कचहरी के चक्कर को आम आदमी ही नहीं बल्कि सरकारें भी बड़ी सिर दर्दी मानती हैं और यह आंकड़ा 6 लाख को पार कर जाए तो अपने आप में चिंता बढ़नी लाजमी है। हरियाणा सरकार के खिलाफ विभिन्न अदालतों में मुकदमों की संख्या 6 लाख को पार कर गई है। इस वक्त सुप्रीम कोर्ट… और उच्च न्यायालय से लेकर निचली अदालतों में हरियाणा सरकार के विरुद्ध कुल 6 लाख 7 हजार 721 मुकदमे चल रहे हैं।

हरियाणा सरकार के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में 2937, उच्च न्यायालय में 1 लाख 28 हजार 864 और निचली अदालतों में 4 लाख 75 हजार 920 मुकद्दमे लंबित हैं। इतने मुकदमे लड़ने के लिए सरकार का तंत्र भी छोटा पड़ने लगा है। फाइलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। न केवल इन मुकदमों में सरकार के भारी-भरकम संसाधन खप रहे हैं, बल्कि वक्त और धन की भी बड़े बड़े पैमाने पर बर्बादी हो रही है।

लगातार बढ़ते जा रहे मुकदमों के आंकड़ों से परेशान हरियाणा सरकार ने अब एक नई कवायद शुरू की है।लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम शुरू कर इसके जरिए तमाम मुकदमों को ऑनलाइन ट्रेक करने का मैकेनिज्म बनाया गया है। अब मुख्यमंत्री ऑफिस से लेकर एडवोकेट जनरल के कार्यालय तक इन मुकदमों पर नजर रखी जा रही है। इसके लिए लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर को पल-पल अपडेट किया जा रहा है। इस पर हरियाणा के अलग-अलग महकमे, कारपोरेशन, विश्वविद्यालय से लेकर तमाम सरकारी निकायों को मिलाकर 177 विभाग पंजीकृत किए गए हैं।

इन पर चल रहे मुकदमों की पूरे 1 हफ्ते की डिटेल रोजाना सुबह 5:00 बजे मेल के जरिए उन को भेजी जाती है, ताकि दिन पर दिन उन मुकदमों की सही तरीके से पैरवी कर उनका निपटान किया जा सके। इसके अलावा अब सरकार एक ही प्रकार के मुकदमों का अध्ययन कर उनके निपटारे के लिए नीति बनाने पर भी विचार कर रही है। इससे भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों के हजारों मुकदमे एक साथ खत्म हो सकते हैं। सबसे ज्यादा मुकदमे पुलिस महकमे से संबंधित है। इसके अलावा और शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों के भी हजारों मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं।

लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम के नोडल अधिकारी हिम्मत सिंह का कहना है कि इन मुकदमों को कम करने के लिए और इनकी सही तरीके से पैरवी करने के लिए अब दिन प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है। सभी संबंधित विभागों को उनके केसों की डिटेल मेल के जरिए रोजाना भेज रहे हैं, ताकि पैरवी में कोई कोताही न रह जाए। उम्मीद है कि धीरे धीरे हम इन मुकदमों का निपटारा कर आंकड़े को काफी कम करने में कामयाब होंगे।