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भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा किंग मेकर यानी चौधरी देवीलाल ? 19वीं पुण्य तिथि आज

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किसान मसीहा जन नायक स्वर्गीय चौधरी देवी लाल की 19वीं पुण्य तिथि आज 6 अप्रैल को उनके समर्थको और राजनैतिक व्यक्तियों द्वारा दिल्ली में उनकी समाधि संघर्ष स्थल पर श्रद्धापूर्वक मनाई गई।

स्वर्गीय चौधरी देवी लाल द्वारा स्थापित राजनैतिक दल इंडियन नैशनल लोकदल के प्रमुख एवं देवीलाल के पोत्र अभय सिंह चौटाला, रवि चौटाला INLD की महिला विंग की महासचिव सुनैना चौटाला, INLD प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा , सांसद चरनजीत सिंह रोड़ी, सांसद राजकुमार कश्यप तथा लगभग एक दर्जन विधायकों और हज़ारों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की । स्वर्गीय चौधरी देवी लाल देश की सबसे बड़े किसान नेताओं में से एक थे और आम जनता में वे ताऊ देवीलाल के नाम से प्रिय थे।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी बड्चड् कर भाग लिया और जेल भी गये। उन्होंने अपना राजनतिक सफ़र संयुक्त पंजाब प्रांत के विधायक के तौर पर शुरू किया तथा मुख्य संसदीय सचिव बने परंतु जल्दी ही उनके मुख्य मंत्री सरदार प्रताप सिंह क़र्रों से मतभेद हो गये और उन्होंने कांग्रिस छोड़ कर प्रफ़ेसर शेर सिंह , बाबू मूलचंद जैन आदि नेताओं के साथ मिल कर नई पार्टी हरियाणा लोक समिति बनायी तथा अलग हरियाणा राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया। अंततः उनके प्रयत्न सफल हुए और एक November 1966 को हरियाणा अलग राज्य बना। पंडित भगवत दयाल शर्मा पहले मुख्य मंत्री बने परन्तु जल्दी ही उन दोनो में नीति गत टकराव हो गया। चौधरी देवीलाल ने डॉक्टर मंगल सेन जैसे ज़नसंघ नेताओं और चौधरी श्रीचंद और राव विरेंदर सिंह जैसे कोंग्रेस्सी नेताओं के साथ मिल कर संयुक विधायक दल का गठन किया और भगवत दयाल को हटा कर राव विरेंदर सिंह को मुख्य मंत्री बनाया।

चौधरी देवीलाल दो बार 1977 और 1987 में हरियाणा के मुख्य मंत्री बने। 1982 में बहुमत होने के बावजूद उन्हें सरकार बनाने का अवसर नहीं दिया गया और दल बदल में माहिर भजन लाल सरकार बनाने में सफल रहे। चौधरी देवीलाल ने भजन लाल सरकार के ख़िलाफ़ जन आंदोलन खड़ा किया जिस में डॉक्टर मंगलसेन जैसे भाजपा नेताओं ने उनका पूरा साथ दिया जिससे 1987 के विधान सभा चुनाव में INLD और BJP गठबंधन को 90 में से 85 रेकर्ड सीटें प्राप्त। हुईं।

किसान मज़दूर हितेसी चौधरी देवीलाल मुख्य मंत्री बने और उनकी सामाजिक विकासत्मक और आर्थिक नीतियों की पूरे देश में प्रशंसा हुई। वे देश भर में बुढ़ापा पेन्शन बेरोज़गारी भत्ता किसानों का क़र्ज़ा माफ़ आदि महत्वपूर्ण योजनाओं के जनक थे। 1987 के पश्चात् उन्होंने तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी पर लगे आरोपों विशेषकर बोफ़ोर्स रिश्वत कांड को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर और सभी गेर कोंग्रेस्सी दलों को इकट्ठा कर के जनता दल का गठन किया जिस के परिणाम स्वरूप 1989 के लोक सभा चुनाव में कांग्रिस को हार का सामना कर ना पड़ा। जनता दल संसदीय बोर्ड ने उन्हें अपना नेता चुना परंतु उन्होंने यह कहते हुए प्रधान मंत्री पद ठुकरा दिया की उनका वी पी सिंह को प्रधान मंत्री बनाने का वायदा है । वी पी सिंह प्रधान मंत्री बने और देवीलाल उप प्रधान मंत्री। इतिहास मे एसी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती। परंतु जल्दी ही दोनों की नितीयों में टकराव होने लगा और उन्होंने वी पी सिंह की सरकार गिरवा कर चंदर शेखर को प्रधान मंत्री बनवा दिया।

चौधरी देवीलाल ने जिस राजनतिक दल INLD का गठन किया था उनकी इस विरासत को उनके बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने बख़ूबी संभाला और उनकी किसान मज़दूर एवं गरमोन्मुखी योजनाओं को आगे बड़ाया। 6 अप्रैल 2001 को किसान मज़दूरों के मसीहा व महान राष्ट्रवादी नेता का देहावसान हो गया । वे अंतिम समय तक जनता की सेवा में लगे रहे। अपने स्वर्गवास से एक दिन पहले भी जब वे हॉस्पिटल में भर्ती थे उन्हें मालूम हुआ की हरियाणा में ओलावृष्टि से फ़सलें ख़राब हो गईं हैं तो उन्होंने वहीं से मुख्य मंत्री ओमप्रकाश चोटाला को किसानो को तुरंत उचित मुआवज़ा देने के लिये कहा। यह था उनका किसानों के प्रति उनका प्यार। आज वे हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनकी नीतियों पर चल कर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।