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2 साल के बाकि सफर में पिछले तीन साल से सुधारों की गति और तेज होगी

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चंडीगढ,26अक्टूबर। हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार ने गुरूवार 26अक्टूबर को तीन साल पूरे कर लिए। इसी दिन वर्ष 2014 में यह सरकार सत्तारूढ हुई थी। अपनी सरकार की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बाकि दो साल के सफर के लिए जो अपना एजेंडा घोषित किया है वह कुछ असाधारण भी है। उन्होंने पत्रकारों के बीच कहा कि अब सरकार के शेष कार्यकाल में प्रतिमाह एक सुघार लागू किया जाएगा।

सरकार की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर मनोहर लाल खट्टर सरकार ने पत्रकार पेंशन योजना का उदघाटन किया। मुख्यमंत्री ने उदघाटन समारोह में वयोवृद्ध पत्रकारों को पेंशन योजना से सम्मानित करते हुए कहा कि प्रदेश में आज विपक्ष मुद्दा विहीन है। इसलिए बाजरा व धान खरीद में गडबडी जैसे मुद्दे उठा रहा है। उन्होंने कहा कि दादूपुर-नलवी नहर परियोजना को भी जबरन मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है जबकि यह नहर बगैर डिब्बे के इंजन की तरह है। अब वर्षों से अटकी सतलुज-यमुना सम्पर्क नहर का निर्माण करने की दिशा में परिणाम जल्दी आने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार बनी तब जनता से किए गए वायदे पूरे करने की जिम्मेदारी थी। यह मांग भी की जा रही थी कि पिछली सरकारों द्वारा किए गए कार्यो की जांच करवा कर कार्रवाई की जाए। लेकिन उनकी सरकार ने जनता के कार्यों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि किसानोें के हित में कई कदम उठाए गए है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि किसान की फसल का बीमा होना चाहिए। इसीलिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई। प्रदेश में शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में अनेक काम किए गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने छह साल में जितना काम किया था वह उनकी सरकार ने तीन साल में पूरा कर दिया। कुल 4150 घोषणाओं में से 2500 घोषणाओं पर काम शुरू किया गया है। यह करीब पच्चीस फीसदी काम है।

उन्होंने कहा कि सरकार का काम एक सामूहिक प्रयत्न है जिसमें मंत्रियों का योगदान भी शामिल है। सरकार ने तीसरी वर्षगांठ पर हर विभाग की उपलब्धियों का प्रदर्शन किया है। इस सवाल पर कि प्रदेश में तीन बार कानून-व्यवस्था गंभीर संकट में आई और सरकार के काबू से बाहर दिखाई दी,मुख्यमंत्री ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन और डेरा सच्चा सौदा जैसे प्रकरण पहले से ही चले आ रहे थे। पंचकूला हिंसा के मामले में हाईकोर्ट ने भी बल प्रयोग का आदेश दिया था। ऐसे हालात में अकेले सरकार के भरोसे सब छोडने के बजाय समाज का भी सहयोग जरूरी था।