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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कडे मुकाबले के संकेत, मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव 2012 में था 74.62 फीसदी

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इस बार शाम छह बजे तक 74 फीसदी मतदान,और बढने के आसार

चंडीगढ,9नवम्बर। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों के लिए गुरूवार को कराए गए मतदान के बाद दोनों परम्परागत प्रतिद्वंद्वियों सत्तारूढ कांग्रेस व मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच कडे मुकाबले के संकेत मिले है। पिछले वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 74.62 फीसदी रहा था और सत्ता परिवर्तन हुआ था। सत्ता भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस को ििमल गई थी। शाम छह बजे तक चुनाव आयोग ने इस बार मतदान 74 फीसदी दर्ज किया है। इसके और बढने के संकेत है। मतदान प्रतिशत में वृद्धि को यदि सत्ता परिवर्तन का संकेत माना जाए तो संभव है हिमाचल प्रदेश निरन्तर एक दल को जनादेश न देने का इतिहास दोहराए।
हिमाचल प्रदेश के इतिहास के अनुसार इस बार के विधानसभा चुनाव का प्रचार सबसे अधिक हंगामी और दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप वाला रहा। बहरहाल कुल 7525 मतदान केन्द्रो पर मतदान शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ।
इस चुनाव में भाजपा को अपने गढ कांगडा व हमीरपुर पर भरोसा है और मंडी से उसे मदद की उममीद है। उधर कांग्रेस की उम्मीदें शिमला,सोलन व बिलासपुर पर टिकी है। कांग्रेस कांगडा से मदद मिलने की उम्मीद कर रही है। निवर्तमान सदन में कांगडा जिले से कांग्रेस के दस सदस्य रहे है। यदि कांग्रेस को कांगडा जिले से इस बार भी इतनी ही मदद मिलती है तो उसकी फिर से सत्ता में वापसी हो सकती है।

निर्दलीय उम्मीदवार पालमपुर,शिमला-

शहरी,रामपुर,चम्बा,शाहपुर,जोगिंदर नगर व रेणुका विधानसभा क्षेत्रों में दोंनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी दलों की संभावनाएं बिगाडते नजर आ रहे है। मतदान के दौरान कई मतदान केन्द्रों से मतदान मशीनों में रूकावट व वीवीएपीटी मशीनों में गडबडी की समस्या सामने आई। लाहौल-स्पीति जिले के गांेडला मतदान केन्द्र पर मतदान नहीं कराया जा सका। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने रामपुर और हमीर पुर में मतदान किया।