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हरियाणा में मैदान बदल कर आने वाले पुराने घोडों पर फिर दांव लगाना चाहती है भाजपा

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पूर्व सांसद अरविन्द शर्मा के पार्टी में शामिल होने का यही है संकेत
चंडीगढ,15मार्च। हरियाणा में भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में मैदान बदल कर आने वाले घोडों पर दांव लगाना चाहती है। प्रदेश में तीन बार लोकसभा सांसद रहे अरविन्द शर्मा के शुक्रवार को नई दिल्ली में भाजपा में शामिल होने से यही संकेत मिलता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस छोडकर आए राव इन्द्रजीत सिंह,धर्मवीर और रमेश कौशिक को सोनीपत और धर्मवीर को भिवानी-महेन्द्रगढ से चुनाव लडाया था और तीनों विजयी रहे थे।

अब अरविन्द शर्मा लोकसभा चुनाव के ऐनवक्त भाजपा में शामिल हुए है तो यही संकेत मिल रहा है कि पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने जा रही है। करनाल से दो बार और सोनीपत से एक बार लोकसभा सांसद रहे अरविंद शर्मा
शुक्रवार को नई दिल्ली भाजपा में शामिल हो गए। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पार्टी के हरियाणा के प्रभारी अनिल जैन इस मौके पर मौजूद थे। अरविन्द शर्मा ने भाजपा की नीतियों में आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए काम कर रहे हैं, ऐसे में उनकी
आस्था भी भाजपा के साथ है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अरविंद शर्मा का भाजपा में स्वागत किया। उन्होने कहा कि अरविंद शर्मा तीन बार सांसद रहे हैं और वरिष्ठ नेता हैं। अरविंद शर्मा के आने से भाजपा को मजबूती मिलेगी और पार्टी भी उन्हें पूरा सम्मान देगी।

अरविंद शर्मा करनाल लोकसभा सीट से दो बार कांग्रेस के सांसद रहे हैं। साल 2014 में हार मिलने के बाद कांग्रेस को छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे। हरियाणा में वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में अरविंद शर्मा बसपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उन्होने बसपा की टिकट पर यमुनानगर और जुलाना से चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों ही जगह से हार गए थे। अरविंद शर्मा वर्ष 2004 तथा 2009 के लोकसभा चुनाव में लगातार दो बार सांसद चुने गए । उन्होंने 2004 में भाजपा के आईडी स्वामी और 2009
में बसपा के मराठा वीरेंद्र सिंह को बड़े अंतर से हराया था। सबसे पहले 1996 में सोनीपत सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज कर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद उन्होने 1998 में सोनीपत से शिवसेना की टिकट पर और 1999 में रोहतक लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। इन दोनों चुनावों में अरविंद शर्मा को हार मिली थी।