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हरियाणा में खेतों में पराली न जलाने के एनजीटी के आदेश की पालना कराने में विपक्ष ने कई खामियां बताईं

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चण्डीगढ़, 23 अक्टूबर । हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए खेतों में फसलों के अवशेष यानी पराली न जलाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश की पालना कराए जाने में राज्य सरकार की ओर से कई खामियां छोडे जाने की बात उठाई। नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश में तो यह भी कहा गया है कि दो एकड तक जमीन वाले किसान के खेत की पराली हटाने का काम सरकार करेगी लेकिन सरकार यह काम करने के बजाय जुर्माने थोप रही है।

इनेलो सदस्यों ने कहा कि प्रदेश में धान की पराली हटाने वाला कोई यंत्र उपलब्ध नहीं है। उधर सरकार दस लाख की जमीन पर महज 50 हजार रूपए मुआवजा दे रही है। ऐसे में मशीन खरीदना सरकार के बूते से बाहर है। पराली को एकत्र करने की जगह भी उपलब्ध नहीं है। पराली हटाने के लिए सरकार को धान पर प्रति क्विंटल 300 रूपए बोनस देना चाहिए। परमिदर सिंह ढुल ने कहा कि पराली जलाने से मात्र पांच फीसदी प्रदूषण होता है जबकि अन्य गतिविधियों से ज्यादा प्रदूषण होता है।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में कृषि व किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड ने कहा कि सरकार खेतों में धान की पराली का बिना जलाए ही समाधान हो, इसके प्रति संजीदा है तथा ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अनुपालना के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है और अब तक दो लाख किसानों को इस विषय में शिक्षित किया जा रहा है। जीरोटिल सीड कम फर्टिलाईजर ड्रील मशीन, हैप्पी सीडर तथा स्ट्रा बेलर के लिए 75 करोड़ रुपये अलग से सब्सिडी के लिए उपलब्ध करवाए गए हैं। अब तक 994 किसानों को आरटीजीएस के माध्यम से 31 करोड़ 39 लाख रुपये की सब्सिडी विशेष शिविरों के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।

धनखड़ ने हरियाणा विधान सभा के सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे हरियाणा की जमीन को ऊसर व बंजर होने से बचाने में सहयोग करें क्योंकि खेत में पराली को जलाना धरती मां के गर्भ को जलाना है। इसके लिए किसान 1500-1600 रुपये बचाने के चक्कर में 15 हजार रुपये से अधिक की भूमि की उर्वरता शक्ति का नुकसान करता है, जिसकी भरपाई वर्षों तक नहीं की जा सकती। किसानों को यह बात समझनी चाहिए। कृषि मंत्री ने बताया कि, 79.9 मेगावॉट क्षमता की बॉयोमास ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही है। हरेडा द्वारा पहले चरण में करनाल, कुरूक्षेत्र, अम्बाला, जींद और फतेहाबाद में बॉयोमास ऊर्जा के तहत 5.5 लाख टन धान की खपत की जाएगी। दूसरे चरण में 11 लाख टन धान की खपत करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, स्वतंत्र बिजली उत्पादकों के माध्यम से पहले दौर में 500 किलोवॉट से 5 मेगावॉट तक के प्लांटों को राज्य में स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने जीरोटिल सीड कम फर्टिलाईजर ड्रील मशीन, हैप्पी सीडर तथा स्ट्रा बेलर जैसे उपकरण खरीदें हैं, उन्हें विभाग अपने साथ रखेगा और 600 रुपये प्रतिदिन की सब्सिडी किसानों को दी जाएगी। इसके अलावा आठ किसानों के समूह को 25 लाख रुपये तक के ऐसे उपकरण खरीदने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जिसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

धनखड़ ने इनेलो विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया के इस सुझाव की सराहना की जिसके तहत उन्होंने एक महीना मनरेगा के तहत धान की पराली उठाने का कार्य करवाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा धान की खरीद के समय पराली के लिए प्रोत्साहन के रूप में 4000 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के सुझाव को भी सही बताया है। उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।