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सरकारी नौकरियों में ग्रामीण और शहर के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता-मुख्यमंत्री

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चंडीगढ,25अक्टूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल के सदस्यों के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्तियों में ग्रामीण और शहर के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
 इनेलो सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था कि जब राज्य सरकार सरकारी नौकरियों में योग्यता के आधार पर ही भर्ती पर जोर दे रही है तो प्रदेश के युवाओं को रियायत के साथ भर्ती किया जाए। योग्यता के मानक से प्रदेश के अस्सी फीसदी युवा सरकारी नौकरी से वंचित हो जायेंगे। ग्रामीण क्षेत्र के निवासी व सरकारी स्कूलों में पढने वाले युवा कान्वेंट एवं प्राइवेट स्कूलों से पढकर निकले युवाओं का मुकाबला नहीं कर पायेंगे। सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को अतिरिक्त अंक देने की मांग की।
प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों में ग्रामीण या शहरी जैसे आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। लेकिन सरकारी नौकरियों में हरियाणा के लोगों की भर्ती के लिए प्रश्नपत्र का 25 फीसदी हिस्सा हरियाणा आधारित होगा और इसमें से साढे बारह फीसदी पास करना जरूरी होगा। भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। पहले की तरह इन्हें सरकारी संरक्षण नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 55 हजार नौकरियों में से 45 हजार का चयन कर लिया गया है। आगे मांग के अनुसार भर्ती की जायेगी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल के दौरान की गई पुलिस भर्ती में अस्सी फीसदी ग्रामीण युवा भर्ती किए गए है। जल्दी ही 6142 क्लर्कों को नियुक्तिपत्र दिए जायेंगे। हरियाणा लोक सेवा आयोग ने 1400 नौकरियां दी है।
मुख्यमंत्री ने इस बात से इन्कार किया कि प्रतिवर्ष दो लाख नौकरी देने का चुनावी वायदा किया गया था। उन्होंने कहा कि नौकरी नहीं इतने रोजगार देने का वायदा किया गया था। तीन साल में तीन लाख से अधिक रोजगार दिए गए है। इनमें साठ से सत्तर फीसदी लोग हरियाणा के है। सरकार ने प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए 442 एमओयू किए है। इनमें से 161 एमओयू पर काम चल रहा है। इनके जरिए दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में साक्षात्कार से योग्यता का मूल्यांकन संभव नहीं था। इसलिए सरकारी भर्तियों में साक्षात्कार समाप्त कर दिया गया है। साक्षात्कार को लेकर शिकायतें मिलती थीं। अलग-अलग क्षेत्रों में अस्सी फीसदी अंक हासिल करने वालों का प्रतिशत अलग-अलग होता था।