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सत्ता किसी की जागीर नहीं विपक्ष ठीक से एकजुट हो – शत्रुघ्न सिन्हा

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चंडीगढ,24फरवरी। भाजपा के पटना से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने रविवार को यहां कहा कि सत्ता किसी की जागीर नहीं है। अब विपक्ष को ठीक से एकजुट
होकर सामने आना चाहिए। परिवर्तन नियम और धर्म है। इसलिए नई व सही दिशा की ओर बढा जाना चाहिए।

सिन्हा ने देश में सत्ता परिवर्तन की यह अपील यहां चंडीगढ लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरमोहन धवन के समर्थन में आयोजित जनसभा में की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि सत्ता में आने का आधार कामकाज होना चाहिए। सिर्फ विदेश भ्रमण और विदेश
में अवार्ड की घोषणा करवाना इसका आधार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अभी मैं भाजपा में ही हूं। मैंने भाजपा नहीं छोडी है और मुझे भाजपा से निकाला
भी नहीं गया है। कहा यह जा रहा है कि मैं मंत्री न बनाए जाने से नाराज हू। असल में मुझे कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने एक शेर के साथ अपना मत प्रकट
किया। उन्होंने कहा कि ’आबरू पर आंच आए तो टकराव जरूरी है,जिदा है तो जिंदा नजर आना जरूरी है’। मुझे इस बार टिकट न दिए जाने की बात कही जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि सिन्हा इस बार टिकट लेगे या नहीं लेंगे। मैं भारतीय जनता पार्टी से पहले भारत की जनता का हू। मुझे टिकट देने वाले भी
बहुत है। मुझ पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है।

सांसद सिन्हा ने सभा में आम आदमी पार्टी प्रत्याशी हरमोहन धवन और पार्टी के नेता व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ को सोने में सुहागा करार दिया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ईमानदार व साफ-सुथरे है। मैं उनकी बहुत कद्र करता हूं। जब भी केजरीवाल बुलाते है मैं उनके साथ खडा होता हूं। केजरीवाल को राजनीति में आने व चुनाव लडने की चुनौती दी गई थी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि रफाल विमान का दाम तीन गुना कैसे हुआ। सुप्रीम कोर्ट भी इस पहलू पर चिंतित है और इसीलिए समीक्षा याचिका सुनवाई के लिए मंजूर कर ली गई है। सीमा पर आतंकवादी हमले को लेकर सिन्हा ने कहा कि आखिर सीमा पार से हथियार कैसे आ रहे है। सरकार को कोई साहसिंक कदम उठाना चाहिए। हम उसके साथ खडे है।

सिन्हा ने कहा कि लोकशाही और तानाशाही में अन्तर है। अटलबिहारी वाजपेयी के समय लोकशाही थी तो आज तानाशाही चल रही है। लालकृष्ण आडवाणी,मुरली मनोहर जोशी और यशवन्त सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेताओं की राय न लेकर मनमाने ढंग से रातोंरात घोषणाएं की जा रही है। केबिनेट में कोई चर्चा नहीं की गई और वित्त मंत्री को भी नोटबंदी की घोषणा कर दी गई। इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ। आम आदमी को परेशान होना पडा। नोटबंदी की तकलीफें दूर होने से पहले ही जीएसटी लागू कर दी गई। इस जीएसटी में साल के 365 दिन से ज्यादा 368 बार संशोधन किए गए। जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते प्रधानमंत्री ने जीएसटी का सबसे ज्यादा विरोध किया था। सभा को संबोधित करने से पहले सिन्हा ने पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।