Home CHANDIGARH मुआवजा राशि लौटाने वाले किसानों से ब्याज वसूल नहीं किया जायेगा

मुआवजा राशि लौटाने वाले किसानों से ब्याज वसूल नहीं किया जायेगा

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चण्डीगढ़, 23 अक्टूबर । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि दादूपुर नलवी नहर परियोजना की भूमि डि-नोटिफाइड करने के हरियाणा सरकार के निर्णय के तहत जो किसान अधिगृहीत जमीन की मुआवजा राशि लौटाएंगे उनसे किसी प्रकार का ब्याज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शाहबाद-दादूपुर नलवी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति किसी भी हालत में नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री आज सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी व श्रम एवं रोजगार मंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में दादूपुर नलवी नहर की अधिसूचना रद्द करने के निर्णय पर उनका आभार व्यक्त करने आए किसानों को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लम्बे अध्ययन के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि दादूपुर नलवी नहर किसान हित में नहीं बल्कि किसानों का नुकसान करने वाली है। इसलिए इसे डि-नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि नहर के लिए 900 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई थी जिसके लिए लगभग छह लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया गया था। उन्होंने कहा कि वापिस की गई जमीन का उपयोग स्कूल, अस्पताल व अन्य विकास कार्यों के अलावा सिंचाई व वन विभाग के पौधारोपण के लिए कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि रजवाहों व माइनरों के न बनने से इस क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो पाती थी और बारिश के समय खदरी व घाड़ क्षेत्र से आने वाला पानी इसमें बाढ़ का कारण बन रहा था। नहर से इंजनों के माध्यम से पानी उठाकर सिंचाई की जाती थी परन्तु 2017 में अध्ययन करवाया तब पता लगा कि केवल 250 एकड़ में सिंचाई हुई है और आबियाना के रूप में केवल 1600 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। भू-जल रिचार्ज भी इस नदी के माध्यम से नहीं हो रहा था और मात्र बाढ़ का खतरा था। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जमीन वापिस करने के बाद इस क्षेत्र में चेतन नाला, राक्षी नाला, सरस्वती नदी व सढौरा नदी के पानी का उपयोग बड़ी पाइपलाइन डालकर सिंचाई के लिए हो इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि कालका से कलेसर तक नौ स्थानों को चिह्नित किया गया है जहां पर छोटे बांध बनाए जाएंगे और पानी का प्रयोग सिंचाई व अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दादूपुर नलवी नहर को लेकर विपक्ष केवल दिखावे के लिए राजनीति कर रहा है। किसान हितों से उनका कोई लेना देना नहीं। उन्होंने कहा कि खेती कितना कठिन व जुए के खेल के समान है। इससे वे भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि वे भी एक छोटे किसान परिवार से तालुक रखते हैं। पांच भाइयों में मात्र 10 एकड़ जमीन पर उनके पिता खेती करते थे।
उन्होंने कहा कि तीन वर्षों के वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हिसार, भिवानी, दादरी, महेन्द्रगढ़ व नारनौल के क्षेत्र में 300 से अधिक ऐसी टेलों पर पानी पहुंचाया गया है जहां 30 वर्षों में कभी पानी नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि पश्चिम यमुना नहर व जवाहर लाल नेहरू मैन फीडर के नहरों व पम्प घरों की मशीनरी की विशेष मरम्मत करवाई जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों की मांग पर शाहबाद में जाट भवन के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की।